Monday, May 07, 2012

Ek taraf tumne mujhe apna bana rakha hai एक तरफ तुमने मुझे अपना बना रखा है


एक तरफ तुमने मुझे अपना बना रखा है

फिर मुसीबत ये के खुद को छुपा रखा है


    घर जो छोड़ा तो यादे भी छुट गयीं सारी

    इसी मुघालते ने मिटने से बचा रखा है



जो हो गया था शराबी इश्क में डूब कर

घर उसने अपना मयखाना बना रखा है


    याद करता है जब तुझे तो लहू रोता है

    जिस्म मिट्टी का उसने गर्द बना रखा है



एक कोशिश तुम भी कर के देख लो ‘शजर’

नाम तिरा वसीयत में उसने लिखा रखा है..
Ek taraf tumne mujhe apna bana rakha hai
Fir musibat ye ke khud ko chupa rakha hai





Ghar jo chhoda to yaadeN bhi chhuṭ gayiN saari

Isii mughaalate ne miṭne se bachaa rakha hai




Jo ho gayaa tha sharaabi ishq meN ḍoob kar

Ghar usne apnaa maykhaanaa banaa rakha hai





Yaad karata hai jab tujhe to lahoo rota hai

Jism miṭṭi ka usne gard bana rakha hai





Ek koshish ‘shajar’ tum bhi dekh lo kar ke

Naam tera vasiyat meN usne likha rakha hai..

कुछ खास नहीं...

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नयी दिल्ली (और फैजाबाद), आकाश गंगा, India
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं .. निदा फ़ाज़ली
नाम : भरत तिवारी ‘दस्तकार’
पिता : स्व. एस.एस. तिवारी
माता : स्व. पुष्प मोहिनी तिवारी
जन्म भूमि : फैज़ाबाद (अयोध्या) उत्तर प्रदेश
कर्मभूमि : नई दिल्ली
शिक्षा : डा. राम मनोहर लोहिया (अवध विश्वविद्यालय ) से विज्ञान में स्नातक
मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर
अभिरुचि: कला , संगीत , लेखन (नज़्म, गीत, कविता) और मित्रता
संप्रतिः पि. ऍम. टी. डिजाइंस के ऍम. डी. आर्किटेक्ट और इंटीरियर डिजाईन में बेहद झुकाव तथा उसमे नई रचनात्मकता के लिए लगातार उधेड़बुन.
प्रकाशनः देश की कई पत्र पत्रिकाओं और ब्लोग्स में सतत प्रकाशन. खुद के ब्लॉग “दस्तकार” का पिछले २ सालों से सफलतापूर्वक संचालन
पता : बी – ७१ , त्रिवेणी , शेख सराय – १, नई दिल्ली , ११० ०१७
ईमेल : mail@bharttiwari.com
अपने बारे में : माँ मेरी हिन्दी की अध्यापिका थीं और उनका साहित्य से लगाव काफी प्रभाव डाल गया बचपन से ही अमृता प्रीतम , महादेवी वर्मा , कबीर और साथ ही जगजीत सिंह के गायन ने निदा फाज़ली, ग़ालिब की ओर मोड़ा शायद वहीँ से चिंतन की उत्पत्ति हुई जो अब मेरे लेखन का रूप लेती है