21/10/10

मेरे साथ कहाँ था

जहाँ मैं

उदास हुआ था

तू

साथ कहाँ था …

 

माला की

मोतियों में

तेरा नाम

क्यों 

लिखा था…

 

घंटियाँ

खनकी मंदिर की 

तेरा नाम

गूँजता था …

 

जमीं में

उगी है

मिट्टी

सोंधा सा

मैं हुआ था …

 

एक

नया सा

चाँद देखा

या

नकाब वो हटा था …

 

कहीं

कुछ

दब सा रहा है

कही

तू जुदा

हुआ था …

 

भरत ००:०० २२/१०/२०१० 

3 टिप्‍पणियां:

  1. achchi abhivyakti...badhai
    samay mile tab mera blog padh sakte hain
    http//vandanapilani.blogspot.com

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  2. कहीं कुछ दब सा रहा है .....कहीं तू जुदा हुआ था......

    बहुत खूब भरत जी ........

    उत्तर देंहटाएं

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