9/10/10

हमें अरसे से इंतेज़ार-ए-दीदार / Hamen arse se inteazaar-e-deedar

हमें अरसे से इंतेज़ार-ए-दीदार
तू देख तो अर्जी मेरी एक बार


तू जाने क्या है फ़िदा हूँ तुझ पे
उतरा है मेरी रूह में हर एक बार


कभी आँखों के समंदर में उतारो
दिखा दो इश्क की गहराई एक बार


मेरी रंगत तेरे नूर की बदौलत है
तू हो कर रह मुझमे बस एक बार


तुझे समझना है मक्सद-ए-उम्र मेरी
कम से कम पलक तो उठा एक बार


मेरे नाम की लखीर है तेरी हंथेली पे
दिखेगा भरत तू जोड़ उन्हें एक बार

 

Hamen arse se inteazaar-e-deedar
tu dekh to arzi meri ek baar


tu jaane kya hai fida hoon tujh pe
utra hai meri ruuh main har ek baar


kabhi aankhon ke samandar me utaro
dikha do ishq ki gahrai hamen bhi ek baar


meri rangat tere noor ki badaulat hai
tu ho kar rah mujhmen bas ek baar


tujhe samajhna hai maqsad-e-umr
kam se kam palak to utha ek baar


mere naam ki lakheer hai teri hatheli pe
dikhega bharat to jod unhe ek baar

bharat 6:21 9/10/2010 new delhi

3 टिप्‍पणियां:

  1. WAH BHARAT JI---- KYA KAHOON KEHNE SHABD HI NAHI BACHE SAARE SHABD TOH OOPERWALE NE AAPKIKALAM KO DE DIYE------AWESOME-----REALLY

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  2. बेहतरीन भरत जी.. बस यूं ही मुस्कुराते रहिये और लिखते रहिये यही दुआ है परवरदिगार से.....


    जाना तो था ही तुझे यूं अकेला मुझको छोड बीच राह में..
    ज़रा मुडकर तो देख निगाहों को अब भी है तेरा इन्तज़ार..


    नीलम

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  3. itni pyaari baat aur ruhaani intejaa ki hai bhai, ussey toh aana hi hai aapke liye..

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