16/10/10

Suun Tu Meri Ruuh Men Basa Jata Hai सुन तू मेरी रूह में बसा जाता है

suun tu meri ruh mein

सुन तू मेरी रूह में बसा जाता है
बखूब मेरे ज़हन में बसा जाता है

तकरार तेरी ना हो तो क्या हो
प्यार से प्यार तू ही कर पाता है

सौंपी तेरे हाँथों में हर डोर अपनी
मेरी खुशियों की पतंग तू उड़ाता है

तू है तो मंजिल नज़र के सामने
हर रास्ता दिल को तेरे जाता है

तू मुस्कुरा दे मेरे एक अशार पे
खुद ब खुद शेर ग़ज़ल बन जाता है

भरत के सारे हर्फ़ तुझ पे कुर्बान
तू मेरी किताब-ए-ज़िंदगी सजाता है

भरत ००:११ १६/१०/२०१० नई दिल्ली

Suun Tu Meri Ruuh Men Basa Jata Hai
Bakhoob Mere Zahan Men Basa Jata Hai

Takraar Teri Na Ho To Kya Ho
Pyar Se Pyar Tu Hi Kar Paata Hai

Saunpii Tere Haanthon Men Har Dor Apni
Meri Khushiyon Ki Patang Tu Udata Hai

Tu Hai To Manzil Nazar Ke Saamne
Har Raasta Dil Ko Tere Jata Hai

Tu Muskura De Mere Ek Ashaar Pe
Khud B Khud Sher Gazal Ban Jata Hai

Bharat Ke Saare Harf Tujh Pe Kurbaan
Tu Meri Kitab-E-Zaindagi Sajata Hai

Bharat 00:11 16/10/2010 New Delhi

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

स्वागत है

नेटवर्क ब्लॉग मित्र