22/11/10

Kahan Jaaoon ... कहाँ जाऊं ... কহাঁ জাঊং ...

कहाँ जाऊं ...

IMG_0340कहाँ से बादल का टुकड़ा आया

कहाँ से दिल को सुकून आया...

 

दिवार घर की बंधी थी पहले

खुली तो नजर आसमां आया ...

 

अभी तो हूँ मैं तेरे हवाले

तुझे ले जाने है अब वो आया ...

 

ये मुस्कराहट भरा सवेरा

उदास चेहरे पे तुझ से आया...

 

भरत की है तू बिटिया रानी

कहाँ वो जाये समझ ना आया ...

भरत २२/११/२०१० १५:२८ कल्याणी

 

 

 

কহাঁ জাঊং ...

 

কহাঁ সে বাদল কা টুকডা আযা

কহাঁ সে দিল কো সুকূন আযা...

 

দিবার ঘর কী বংধী থী পহলে

খুলী তো নজর আসমাং আযা ...

 

অভী তো হূঁ মৈং তেরে হবালে

তুঝে লে জানে হৈ অব বো আযা ...

 

যে মুস্করাহট ভরা সবেরা

উদাস চেহরে পে তুঝ সে আযা...

 

ভরত কী হৈ তূ বিটিযা রানী

কহাঁ বো জাযে সমঝ না আযা ...

 

ভরত ২২/১১/২০১০ ১৫:২৮ কল্যাণী

 

 

Kahan Jaaoon ...

Kahan Se Baadal Ka Tukda Aaya

Kahan Se Dil Ko Sukoon Aaya...

 

Diwar Ghar Ki Bandhi Thi Pahle

Khuli To Nazar Aasmaan Aaya ...

 

Abhi To Hoon Main Tere Hawaale

 Tujhe Le Jaane Hai Ab Wo Aaya ...

 

Ye Muskurahat Bhara Sawera

Udaas Chehare Pe Tujh Se Aaya...

 

Bharat Ki Hai Tuu Bitiya Rani

Kahan Wo Jaaye Samajh Na Aaya ...

 

Bharat 22/10/2010 15:28 Kalyani

2 टिप्‍पणियां:

  1. sundar rachnaa... beti ke liye papa ke dil kaa prem se bharee ye kavita sundar hai..
    Bharat ji kabhi hamre blog me bhi padaarpan kijiye aur apne vicharo se anugrahit kijie..

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  2. अभी तो हूँ तेरे हवाले !
    तुझे ले जाने है अब वो आया !!
    बहुत खूब भारत जी...

    उत्तर देंहटाएं

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