7/11/10

Maa ! Fir Tyohaar / माँ ! फिर त्यौहार

माँ ! फिर त्यौहार
और तुम्हारी याद

कहाँ तो
सामने होती थी
कहाँ अब
तस्वीर बन गयीmaa
कहीं से तो रोको
किसी बात पे तो डांट दो

थोड़ा दुलार
बस बहुत थोड़ा सा

एक बार बस
पुकार दो

बोल दो
कि कहाँ थे
कह दो
कि बड़े हो गए हो अब

कहाँ हो पाया
बड़ा
वैसा ही हूँ
जैसा था

वैसे ही ढूँढता हूँ
अचार की महक
स्कूल से वापस आ के
रोज़ ब रोज़
©  भरत तिवारी सर्वाधिकार सुरक्षित
 
 
Maa ! Fir Tyohaar
Aur Tumhari Yaad


Kahan To
Saamane Hoti Thi
Kahan Ab
Tasveer Ban Gayi


Kahin Se To Roko
Kisi Baat Pe To Daant Do


Thoda Dular
Bas Bahut Thoda Sa


Ek Baar Bas
Pukar Do


Bol Do
Ki Kahan The
Kah Do
Ki Bade Ho Ge Ho Ab


Kahan Ho Paaya
Bada
Waisa Hi Hoon
Jaisa Tha


Waise Hi Dhoondhata Hoon
Achaar Ki Mahak
School Se Wapas Aa Ke
Roz B Roz

© Bharat Tiwari All rights reserved

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !...ऊन्दा बहुत...!
    तेल में सिंचते हुए परांठों की खुश्बू , महक अचार की ...
    पटका बस्ता यहां-तहां ,जलती उंगलियां,ज़बान है जलती ...
    मां , अब बस बहुत हुआ ,ले आओ पकौडों संग गर्मागर्म चाय जल्दी !
    :)

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  2. अमन
    क्या कहूँ
    माँ की महिमा अपरम्पार है

    उत्तर देंहटाएं
  3. Bharat ji ! maa ke liye to hum kabhi bhi bade nahi hote hai...maa to jab bhi kareeb hoti hai,unse hume bachpan jaisa hi pyaar dulaar milta hai...

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