9/12/10

कहाँ से तेरे ये मोती आते

कहाँ से तेरे ये मोती आते
यहाँ के सारे अँधेरे जाते …
   तूने भरा होगा अपनी बाँहों में
   यों नहीं ख्वाब महकते आते …
अब मेरी पलक नहीं झुकती
नाम हवाओं में जो लिखे जाते …
   इश्क में खबर नहीं थी हमको 
   ये चाँद सिर्फ ईद में नज़र आते...
कुछ इतना ताज़ा वो तेरा अहसास  
‘भरत’ के घाव खुद-ब-खुद भर जाते…

भरत ९/१२/२०१० नई दिल्ली

1 टिप्पणी:

  1. ईद के चाँद से घाव भरने के ख्याल दूर तक ले गए और कहीं यादों के महकते गुलशन में छोड़ दिया अहसास को महकने के लिए

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