9/12/10

एक पत्ता / Ek Pattha

तुम confused heart
ऐसे घूम जाते हो
 
मैं
बस देखता रह गया
 
एक पत्ते सा दिल
तुम्हारे पीछे
साथ साथ
दूर तक आया
 
अच्छा किया
तुमने
 
उसे सम्हाल लिया
और
रख दिया
 
किताब में
 
पन्नों के बीच
…………….भरत ९/१२/२०१० नई दिल्ली
 
Tum
Aise Ghoom Jaate Ho
 
Main
Bas Dekhta Rah Gaya
 
Ek Patte Sa Dil
Tumhaare Peechhe
Saath Saath
Door Tak Aaya
 
Achhcha Kiya
Tumne
 
Use Samhaal Liya
Aur
Rakh Diya
 
Kitab Men
 
Pannon Ke Beech
 
…………….Bharat Tiwari 9/12/2010 New Delhi

1 टिप्पणी:

  1. ...और रख दिया किताब में पन्नों के बीच मार्मिक बात .ये पत्ते कभी सूखते नहीं दिल जो हैं .सभी के पास संजोए होते हैं .किताब,फूल पत्र,तस्वीरें ...जीवन समझोतों का नाम है.इसलिए कई बार भूलने का सामन भी करना पड़ता है चाहे जलादो फिर भी कभी ना कभी उड़ते आँखों के सामने चले ही आते हैं ,

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