21-10-10

मेरे साथ कहाँ था

3 टिप्‍पणियां:

जहाँ मैं

उदास हुआ था

तू

साथ कहाँ था …

 

माला की

मोतियों में

तेरा नाम

क्यों 

लिखा था…

 

घंटियाँ

खनकी मंदिर की 

तेरा नाम

गूँजता था …

 

जमीं में

उगी है

मिट्टी

सोंधा सा

मैं हुआ था …

 

एक

नया सा

चाँद देखा

या

नकाब वो हटा था …

 

कहीं

कुछ

दब सा रहा है

कही

तू जुदा

हुआ था …

 

भरत ००:०० २२/१०/२०१० 

tumhaare sang hoon main / तुम्हारे संग हूँ मैं

कोई टिप्पणी नहीं:

Bitiya-Tumhare Sang hoon main

बिटिया

तुम्हे हँसने के लिये बनाया है सृष्टि ने

 

उदासी से दूर

दुखों से परे

प्यार की परछाईं तले

 

बिटिया

भेड़ियों की प्रजाति को खत्म करना

मेरा ही काम है

 

बिटिया

कोई अकेला नहीं सब अकेले होते हैं

ब्रह्मांड सब में है

ब्रह्मांड में सब

 

बिटिया

तुम निर्भय हो के चलो

सृष्टि में

तुम्हारे संग हूँ मैं एक पिता.

 

 

bitiya

tumhe hansne ke liye banaya hai srishti ne

udaasi se door

dukhon se pare

pyar ki parachhain tale

 

bitiya

bhediyon ki prajati ko khatm karana

mera hi kaam hai

 

bitiya

koi akela nahin sab akele hote hain

brahmaand sab men hai

brahmaand men sab

 

bitiya

tum nirbhaya ho ke chalo

srishti men

tumhaare sang hoon main ek pita.

17-10-10

मनाओ विजयदशमी

कोई टिप्पणी नहीं:

माँ ने महिषासुर हरा

श्रीराम ने रावण वधा

रावण मृत्युलोक में

मनाओ विजयदशमी

16-10-10

Suun Tu Meri Ruuh Men Basa Jata Hai सुन तू मेरी रूह में बसा जाता है

कोई टिप्पणी नहीं:

suun tu meri ruh mein

सुन तू मेरी रूह में बसा जाता है
बखूब मेरे ज़हन में बसा जाता है

तकरार तेरी ना हो तो क्या हो
प्यार से प्यार तू ही कर पाता है

सौंपी तेरे हाँथों में हर डोर अपनी
मेरी खुशियों की पतंग तू उड़ाता है

तू है तो मंजिल नज़र के सामने
हर रास्ता दिल को तेरे जाता है

तू मुस्कुरा दे मेरे एक अशार पे
खुद ब खुद शेर ग़ज़ल बन जाता है

भरत के सारे हर्फ़ तुझ पे कुर्बान
तू मेरी किताब-ए-ज़िंदगी सजाता है

भरत ००:११ १६/१०/२०१० नई दिल्ली

Suun Tu Meri Ruuh Men Basa Jata Hai
Bakhoob Mere Zahan Men Basa Jata Hai

Takraar Teri Na Ho To Kya Ho
Pyar Se Pyar Tu Hi Kar Paata Hai

Saunpii Tere Haanthon Men Har Dor Apni
Meri Khushiyon Ki Patang Tu Udata Hai

Tu Hai To Manzil Nazar Ke Saamne
Har Raasta Dil Ko Tere Jata Hai

Tu Muskura De Mere Ek Ashaar Pe
Khud B Khud Sher Gazal Ban Jata Hai

Bharat Ke Saare Harf Tujh Pe Kurbaan
Tu Meri Kitab-E-Zaindagi Sajata Hai

Bharat 00:11 16/10/2010 New Delhi

15-10-10

Izhaar-E-Ishq Karne Ki Soch

कोई टिप्पणी नहीं:

Izhaar-e-Isq Karne Ki Sonch

इज़हार-ए-इश्क करने की सोच
भरत २०:४६ १४/१०/२०१० नई दिल्ली

इज़हार-ए-इश्क करने की सोच
इबादत-ए-इश्क करने की सोच


कब है अलग खुदा इश्क से
उम्र साथ बसर करने की सोच


वक्त रुकता है दर-ए-यार पर
घर उसके दुआ करने की सोच


निगाहों से वो करम बरसाता है
उस से आँखें चार करने की सोच


जो देता है ये बे-इंतेहा खुशियाँ
तू उसको खुश करने की सोच


बड़ी है तेज रफ़्तार-ए-उम्र ‘भरत’
सफ़र साथ तय करने की सोच

Izhaar-E-Ishq Karne Ki Soch
Bharat 20:46 14/10/2010 New Delhi

Izhaar-E-Ishq Karne Ki Soch
Ibadat-E-Ishq Karne Ki Soch


Kab Hai Alag Khuda Ishq Se
Umr Saath Basar Karne Ki Soch


Waqt Rukta Hai Dar-E-Yaar Par
Ghar Usske Dua Karne Ki Soch


Nigahon Se Wo Karam Barsaata Hai
Uss Sey Aankhen Chaar Karne Ki Soch


Jo Deta Hai Ye Be-Inteha Khushiyaan
Tu Ussko Khush Karne Ki Soch


Badi Hai Tez Rafatar-E-Umr ‘Bharat’
Safar Saath Taya Karne Ki Soch

13-10-10

याद मिटा दूँगा yaad mita doonga

3 टिप्‍पणियां:

Vincent Van Gogh - Olive Trees With Yellow Sky And Sun 

Vincent Van Gogh - Olive Trees With Yellow Sky And Sun

बीती रात

इक ख्वाब टूटा था

सहमा हूँ

शाम होने को है

 

घर को दस्तक

ना दे

नाम दरवाजे से हटा दो

 

तस्वीरें जलानी है

हर तरफ़ पुर्ज़े पड़े हैं

चेहरे हों या हर्फ़

धुंध छानी ही थी

 

भूलने को उम्र पड़ी है

याद मिटा दूँगा

एक दिन

 

ख्वाबों में बसा नहीं करता

सामने आइना रखा है मेरे

तोड़ के अपनी तस्वीर

तू खुद से कहाँ भागेगा

परछाईं जाती नहीं

अमावस आती नहीं

पूरे चाँद की रात

हमेशा चांदनी देती नहीं

 

जो डूबेगा सूरज

पहाड़ियों के दरख्त के पीछे

मकान तुझे दिख जायेगा

घर नज़र ना आयेगा

तेरा घर नज़र ना आयेगा

beeti raat

ik khwab toota tha

sahama hoon

shaam hone ko hai

 

ghar ko dastak

na de

naam darawaaje se hata do

 

tasweeren jalaani hain

har taraf purze pade hain

chehre hon ya harf

dhundh chhani hi thi

 

bhoolne ko umr padi hai

yaad mita doonga

ek din

 

khwaabon men basa nahin karta

saamane aaina rakha hai mere

tod ke apani tasweer

tuu khud se kahan bhagega

parachhain jaati nahin

amaawas aati nahin

poore chaand ki rat

hamesha chaandni deti nahin

 

jo doobega sooraj

pahadiyon ke darakht ke peechhe

makaan tujhe dikh jayega

ghar nazar na aayega

tera ghar nazar na aayega

11-10-10

Jo Uss Khuda Ne Tay Kiya Hoga / जो उस खुदा ने तय किया होगा

5 टिप्‍पणियां:

Jo Uss Khuda Ne Tay Kiya Hoga / जो उस खुदा ने तय किया होगा

Yellow Red Blue, a painting by Wassily Kandinsky

जो उस खुदा ने तय किया होगा

तेरी किस्मत में बस वही होगा

 

दिल की पुकार जाती है वहाँ तक

सवाल तो कर जवाब सही होगा...

 

तू उसकी रहमत पे भरम ना रख

उसकी झोली में तेरा ख्वाब ही होगा ...

 

कब आ जाये तेरे दर, क्या मालुम

रूह को साफ़ रख घर वही होगा ...

 

  तेरी मंज़िल कभी मुश्किल नहीं

राह में वो खुद तेरा हमराही होगा

 

लखीर-ए-पेशानी किस्मत-ए-भरत

परेशान होने से कुछ नहीं होगा

 

 

भरत तिवारी  ११/१०/२०१० नई दिल्ली

Jo Uss Khuda Ne Tay Kiya Hoga

Teri Kismat Men Bas Wahi Hoga

 

Dil Ki Pukar Jaati Hai Wahan Tak

Sawal Toh Kar Jawab Sahi Hoga...

 

Too Uss’ki Rehmat Pe Bhram Na Rakh

Usski Jholi Men Tera Khwab Hi Hoga ...

 

Kab Aa Jaaye Tere Dar, Kya Maalum

Ruh Ko Saaf Rakh Ghar Wahi Hoga ...

 

Teri Manzil Kabhi Mushkil Nahin

Raah Men Wo Khud Tera Hamrahi Hoga

 

Lakheer-E-Peshani Kismat-E-Bharat

Pareshaan Hone Se Kuch Nahin hoga

 

 

Bharat Tiwari  11/10/2010  New Delhi

10-10-10

महफ़िल को शमा दिखाओ तो क्या Mehafil Ko Shama Dikhao To Kya

कोई टिप्पणी नहीं:
The-Four-Seasons-Spring 

महफ़िल को शमा दिखाओ तो क्या

अब कोई कमाल दिखाओ तो क्या

 

तूफ़ान था, गया साथ हवाओं के

उसे हुस्न के जलवे दिखाओ तो क्या

 

तेरे होने से आँगन आँगन था

धूल अब लाख हटाओ तो क्या

 


मेरे पास चंद अशार है

तेरे साथ रंग-ओ-खुमार है  

दौलत पे जो मर जाओ तो क्या

 

कब कदर की जज़्बे की तूने

नज़रों को तेरी फुरसत थी कहाँ

रूह जो मर के भी है प्यासी 

अब कब्र पे दिये जलाओ तो क्या

 


हाल-ए-दिल भरत बयान करता है

समझ के भी न समझ पाओ तो क्या

Mehafil Ko Shama Dikhao To Kya

Ab Koi Kamaal Dikhao To Kya

 

Toofaan Tha, Gaya Saath Hawaaon Ke

Usse Husn Ke Jalave Dikhao To Kya

 

Tere Hone Se Aangan Aangan Tha

Dhool Ab Lakh Hatao To Kya

 

Mere Paas Chand Ashar Hai

Tere Saath Rang-O-Khumar Hai

Daulat Pe Jo Mar Jaao To Kya

 

Kab Kadar Ki Jazabe Ki Tuune

Nazaron Ko Teri Furasat Thi Kahan

Ruuh Jo Mar Ke Bhi Pyasi Hai

Ab Kabr Pe Diye Jalao To Kya

 

Haal-E-Dil ‘Bharat’ Bayan Karta Hai

Samajh Ke Bhi Na Samajh Paao To Kya

………………………………Bharat Tiwari / New Delhi 10/10/10

9-10-10

हमें अरसे से इंतेज़ार-ए-दीदार / Hamen arse se inteazaar-e-deedar

3 टिप्‍पणियां:

हमें अरसे से इंतेज़ार-ए-दीदार
तू देख तो अर्जी मेरी एक बार


तू जाने क्या है फ़िदा हूँ तुझ पे
उतरा है मेरी रूह में हर एक बार


कभी आँखों के समंदर में उतारो
दिखा दो इश्क की गहराई एक बार


मेरी रंगत तेरे नूर की बदौलत है
तू हो कर रह मुझमे बस एक बार


तुझे समझना है मक्सद-ए-उम्र मेरी
कम से कम पलक तो उठा एक बार


मेरे नाम की लखीर है तेरी हंथेली पे
दिखेगा भरत तू जोड़ उन्हें एक बार

 

Hamen arse se inteazaar-e-deedar
tu dekh to arzi meri ek baar


tu jaane kya hai fida hoon tujh pe
utra hai meri ruuh main har ek baar


kabhi aankhon ke samandar me utaro
dikha do ishq ki gahrai hamen bhi ek baar


meri rangat tere noor ki badaulat hai
tu ho kar rah mujhmen bas ek baar


tujhe samajhna hai maqsad-e-umr
kam se kam palak to utha ek baar


mere naam ki lakheer hai teri hatheli pe
dikhega bharat to jod unhe ek baar

bharat 6:21 9/10/2010 new delhi

8-10-10

कारक

2 टिप्‍पणियां:

असल माँ

अंदर होती है

खैर

आसन नहीं है उसको देख पाना

वैसे भी

कोशिश ही कब करी

 

 

माँ लाल नहीं होती

माँ के लाल होते हैं

और कोई रंग माँ का

रंग तो माँ का जी नहीं हो सकता

पानी होती है

अंदर तक हमारे

 

 

जब आये थे तो भी

जब जाओगे तो भी

माँ रहेगी हमेशा

वो किसी के होने से नहीं है

उसके होने से ही...

ये सब जो घूम रहा है ,

वो घूम रहा है

कारक ...

 

 

उसके होने से ही था, है

और रहेगा अनंतकाल तक

ना जब कुछ था तो माँ थी

कुछ ना होगा तो भी होगी...

 

 

भरत २१:०२ ७/१०/२०१०

3-10-10

हम तो तब ही रंग गए थे / Hum to tab hi rang gaye the

2 टिप्‍पणियां:

हम तो तब ही रंग गए थे

जब मैं से हम हुए थे...

इश्क का ख्वाब देखा

फिर कहाँ हम हुए थे ...

प्यास से मोहब्बत

बे-अब जो हम हुए थे ...

वो गरीब शहर अजीब था

जहाँ दुनिया के हम हुए थे ...

आँख लगती नहीं ‘भरत’ की

किस नज़र से जुदा हम हुए थे...

 

*बे-अब = बिना पानी के

भरत तिवारी `१६:४२ ०३/१०/२०१० नई दिल्ली

 

bharat tiwari writer ghazal

Hum to tab hi rang gaye the

Jab main se hum huey the...

 

Ishq ka khwab dekha

Fir kahan hum huey the ...

 

Pyas sey mohabbat

Be-ab jo hum huey the ...

 

Wo gareeb shahar ajeeb tha

Jahan duniya ke hum huey the ...

 

Aankh lagti nahin ‘bharat’ ki

Kis nazar se juda hum huey the...

 

*Be-ab = Without water

Bharat Tiwari 16:42 03/10/2010 New Delhi

1-10-10

अब ना ज्यादा सोंचो / Ab na jyada soncho

कोई टिप्पणी नहीं:
अब ना ज्यादा सोंचो
के अब चैन से जी लो...
हवा का मिजाज़ है खुश
सुबह के परिंदों से जी लो ...
गयी वो जागती रातें
चादर तान के सो लो ...
है मोहल्ला ये तुम्हारा ही
पड़ोसी से भी जा मिल लो..
तुम्हे सुबह सजानी है
चाय कड़क सी एक पी लो ..
भरत है आज खुश मालिक
जो जी चाहे आज ले लो ...

भरत ७:४५ १/१०/२०१०

Ab na jyada soncho
Ke ab
Chain se jee lo...

Hawa ka mizaaz hai khush
Subah ke parindon se jee lo ...

Gayi wo jaagti raaten
Chaadar taan ke so lo ...

Hai mohalla
Ye tumhara hii
Padosi se bhi ja mil lo..

Tumhe subah sajaani hai 
Chaay kadak si ek pi lo  .. 

Bharat hai aaj khush malik
Jo ji chahe
Aaj le lo ..

Bharat Tiwari
7:45 1/10/2010

नेटवर्क ब्लॉग मित्र