26/1/11

Vishwagaan وشوگان विश्वगान বিশ্বগান ਵਿਸ਼੍ਵਗਾਨ

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مسکان ہوا میں ذرا سی ڈالو
تم کو ملے گا سلام ہمارا


سب کی ہے یہ نیلی چھتری
نام کچھ نہیں اور ہمارا



جدا بھلا اب کوئی کیسے کرے گا
عشق جو بنا ہے مذہب ہمارا

آج کے تو ہم نہیں ہیں
صدیوں کا ہے ملن ہمارا

حصّے کی گر کرے بات کوئی
بول دینا کے ہر شے ہے ہمارا

چوٹیں کھائیں ہیں ہم نے ہزاروں
زخم ٹکتا نہیں ہمارا


ایک ہونے کا لطف لو بھارت
ملو گاؤ وشوگان ہمارا



মুস্কান হবা মেং রা সী ডালো
মিলেগা তুমকো সলাম হমারা

সব কী হৈ যে নীলী ছতরী
নাম কুছ নহীং ঔর হমারা

জুদা ভলা অব কোঈ কৈসে করেগা
ইশ্ক জো বনা হৈ মহব হমারা 

আজ কে তো হম নহীং হৈং
সদিযোং কা হৈ মিলন হমারা

হিস্সে কী গর করে বাত কোঈ
বোল দেনা কি হর শৈ হৈ হমারা

চোটেং খাঈ হৈং হমনে হজারোং
খ্ম টিকতা নহীং হমারা

এক হোনে কা লুত লো ‘ভরত’
মিলো গাও বিশ্বগান হমারা
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ਮੁਸ੍ਕਾਨ ਹਵਾ ਮੇਂ ਜਰਾ ਸੀ ਡਾਲੋ
ਮਿਲੇਗਾ ਤੁਮਕੋ ਸਲਾਮ ਹਮਾਰਾ

ਸਬ ਕੀ ਹੈ ਯੇ ਨੀਲੀ ਛਤਰੀ
ਨਾਮ ਕੁਛ ਨਹੀਂ ਔਰ ਹਮਾਰਾ

ਜੁਦਾ ਭਲਾ ਅਬ ਕੋਈ ਕੈਸੇ ਕਰੇਗਾ
ਇਸ਼੍ਕ ਜੋ ਬਨਾ ਹੈ ਮਹਬ ਹਮਾਰਾ 

ਆਜ ਕੇ ਤੋ ਹਮ ਨਹੀਂ ਹੈਂ
ਸਦਿਯੋਂ ਕਾ ਹੈ ਮਿਲਨ ਹਮਾਰਾ

ਹਿਸੇ ਕੀ ਗਰ ਕਰੇ ਬਾਤ ਕੋਈ
ਬੋਲ ਦੇਨਾ ਕਿ ਹਰ ਸ਼ੈ ਹੈ ਹਮਾਰਾ

ਚੋਟੇਂ ਖਾਈ ਹੈਂ ਹਮਨੇ ਹਜਾਰੋਂ
ਜਖਮ ਟਿਕਤਾ ਨਹੀਂ ਹਮਾਰਾ

ਏਕ ਹੋਨੇ ਕਾ ਲੁਤ੍ਫ਼ ਲੋ ‘ਭਰਤ’
ਮਿਲੋ ਗਾਓ ਵਿਸ਼੍ਵਗਾਨ ਹਮਾਰਾ
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मुस्कान हवा में ज़रा सी डालो
मिलेगा तुमको सलाम हमारा

सब की है ये नीली छतरी 
नाम कुछ नहीं और हमारा

जुदा भला अब कोई कैसे करेगा 
इश्क जो बना है मज़हब हमारा 

आज के तो हम नहीं हैं 
सदियों का है मिलन हमारा

हिस्से की गर करे बात कोई 
बोल देना कि हर शै है हमारा

चोटें खाई हैं हमने हजारों
ज़ख्म टिकता नहीं हमारा

एक होने का लुत्फ़ लो भरत
मिलो गाओ विश्वगान हमारा
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Muskaan Hawa Men Zara Si Daalo
Milega Tumko Salam Hamaara

Sab Ki Hai Ye Neeli Chhatri
Naam Kuch Nahin Aur Hamaara

Juda Bhala Ab Koi Kaise Karega
Ishq Jo Bana Hai Mazhab Hamaara

Aaj Ke To Ham Nahin Hain
Sadiyon Ka Hai Milan Hamaara

Hisse Ki Gar Kare Baat Koi
Bol Dena Ki Har Shai Hai Hamaara

Choten Khaai Hain Hamne Hazaron
Zakhm Tikta Nahin Hamara

Ek Hone Ka Lutf Lo ‘Bharat’
Milo Gao Vishwagaan Hamaara




© Bharat Tiwari All rights reserved


2 टिप्‍पणियां:

  1. "भरत" और "भारत"........दोनों को सलाम, !!जय हिंद !!

    शुभकामनाये - गायत्री

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  2. इश्क जो बना है मज़हब हमारा
    आज के तो हम नहीं हैं
    सदियों का है मिलन हमारा.............वाह आज देश को इसी सकरात्मक सोच की जरुरत है कही ...बहुत सुन्दर पक्र्तियों का जमावड़ा किया है भाई जी आप ने..भला कैसे खड़ी हो जाएगी दीवार उस घर में जहाँ चलता अभी तक भाइयों का साथ रहने का पट्टा अभी तक ...और लोग तो कहेंगे है की खुद अलग हो कर बढ़ो पर नीव तो मिली हुई है कही इस प्रेम रूपी घर की !!!!!!!सुन्दर आज के दिन की पेशकश!!!!!!!!!!!!!!!!!Nirmal Paneri

    उत्तर देंहटाएं

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