23/2/11

Main aaya hi kab tha ki kahin jaoonga / मैं आया ही कब था की कहीं जाऊँगा


मैं आया ही कब था की कहीं जाऊँगा...
मैं एक साया ही था अभी ढल जाऊँगा...
  मैं गया ही कहाँ था के फिर से आऊंगा...
  तेरा साया था साया ही नज़र आऊंगा ..
मैं अब इस वक्त से गिला रोक डालूँगा ...
बस वक्त की धार में खुद को बहा डालूँगा ... 
  एक बार तो ज़रूर उठाऊँगा हथियार अब
  गर जो तू मिल गया तो फ़ेंक डालूँगा 
‘भरत’ की राहों के हर मुसाफ़िर में तू है
अब मंज़िल का पता कहाँ से लाऊंगा ...

Main aaya hi kab tha ki kahin jaoonga...
Main ek saya hi tha abhi dhal jaoonga...
  Main gaya hi kahan tha ke fir se aaunga...
  Tera saya tha saya hi nazar aaunga ..
Main ab is waqt se gila rok daaloonga ...
Bas waqt ki dhaar men khud ko baha daaloonga ...
  Ek baar to zaroor uthaoonga hathiyar ab
  Gar jo tu mil gaya to fenk daaloonga
‘bharat’ ki rahon ke har musafir men too hai
Ab manzil ka pata kahan se launga

(C) Bharat Tiwari all rights reserved...

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