1/3/11

तुम मेरे माज़ी मेरे आज मेरे कल हो / Tum mere maazi mere aaj mere kal ho

तुम मेरे माज़ी मेरे आज मेरे कल हो
तुम ही मेरी हर आरज़ू की शक्ल हो

 
तुम में रब ने खुद अपने को बसाया
तुम ही मेरी जिंदगी के हसीन पल हो

तुम ही मंदिर की मूरत, सूरत-ऐ-खुदा हो
तेरा दर ही जन्नत, एक तुम ही असल हो

तुम ही से है ये दुनिया तुम से ही आसमां है
तुम मालिक-ऐ-आलम बस तुम ही अज़ल हो

मेरी रूह में हो तुम मेरी धड़कने भी तुम हो
तुम ही तो 'भरत' के आसमान का बादल हो 


 

Tum mere maazi mere aaj mere kal ho
Tum hi Meri Har Aarzoo Ki Shakl Ho...

Tum me rab ne khud apne ko basaya
Tum hi meri zindagi ke haseen pal ho...

Tum hi mandir Ki Muurat, Suurat-e-Khuda Ho
Tera Dar Hi Jannat, Ek tum hi Asal ho...

Tum Hi se Hai Ye Duniya Tum Se hi Aasmaan Hai
Tum Maalik-e-Aalam bas tum hi  azal* ho...

Meri Rooh Me Ho Tum Meri Dhadkane Bhi Tum Ho
Tum hi to 'Bharat' ke aasmaan ka baadal ho..


*azal/अज़ल  = existence from eternity

2 टिप्‍पणियां:

  1. हर तरफ बस तुम ही तुम हो. अति सुंदर रचना क लिए बहुत बहुत बधाई

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