28/4/11

विसुअल ब्लाक और इनटेलैकचुअल ब्लाइंडनेस


विसुअल ब्लाक और इनटेलैकचुअल ब्लाइंडनेस...दोनों ही इंसान को अपनी उम्र से कई साल पीछे, घड़ी के किसी एक टिक पे रोक के रखते हैं ,और जब अचानक, किसी एक पल में, वक़्त की छलांग लगती है, तो इंसान आज (अब) का सामना कर चौंक जाता है...

जैसे की ... किसी बच्चे को जब 5 साल की उम्र का देख हम कहीं लन्दन/अमेरिका चले जाते हैं ...तो उसके लिए हमारी सोच का वक़्त वहीँ रुक जाता है...इस दौरान हम ज़रूर बढ़ रहे होते हैं...दुनिया बढ़ रही होती है...पर हमारे ज़ेहन में वो बच्चा अक्ल और शरीर से पाँच साल का ही रहता है...हम उसे बढ़ने ही नहीं देते...और फिर जब 10 साल के बाद हम उससे मिलते हैं तब हमारा रिएक्शन होता है..."अरे !!! यह इतना बड़ा हो गया !!! ???...ओह!!!  माय गौड ... इतनी बड़ी बड़ी बातें भी करने लगा...!!!

इन दोनों ही सूरतों से हमारी इंटरटेन्मेंट इंडस्ट्री और दुनिया जूझ रही है...:) 

अरे !!! वो राज कुमार गुप्ता...वो तो मेरे एक्स-बोयफ़्रेंड का सहायक था... उसे तो कोंटीन्युटी लिखना भी नहीं आता था... और उसने दो-दो फिल्में दिरेक्ट कर लीं..."सच यार अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान"  ...इस रिएक्शन से पहले एक बार भी हम यह नहीं सोचते की 10 साल पहले हम भी तो जैसे आज हैं वैसे नहीं थे.
अमल दोंन्वार
अमल दोंन्वार.... फिल्म इंडस्ट्री के उभरते हुए प्रतिभाशाली गीतकार , लेखक और दिग्दर्शक हैं




कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

स्वागत है

नेटवर्क ब्लॉग मित्र