30/4/11

सुने ज़रा ३०-०४-२०११ / Sune Zara 30-04-2011

अब ये ठानी है खुशियों तुझे तलाश नहीं करना है 

अब है मालूम के तू तस्सलीयों में छुप के रहती है


Ab ye thhani hai ke khushiyon tujhe talaash nahi karna hai


ab hai maalum ke tu tassali'yon me chhup ke rahti hai



1 टिप्पणी:

  1. बेनामी8:28 am, मई 23, 2011

    My cousin recommended this blog and she was totally right keep up the fantastic work!

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