27/4/11

us ek pal ne bujha diya / उस एक पल ने बुझा दिया


2 टिप्‍पणियां:

  1. जो बीत गयी ,उसे भुला दो
    लम्बी उम्र की चाह भी न रखो
    जो पल जिंदगी के बचे हैं
    हर इक पल को तुम भरपूर जियो
    जो नम होंगी ऑंखें 'दस्तकार' की
    तो बहुत बरसेगी आँखे उसके 'यार' की ...!!!

    पहली बार आपकी रचना में इतना ज्यादा दर्द देखा , आखिरी की दो लाइन पढ़कर मन भर आया ! बहुत खूबसूरत रचना !

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