21/6/11

तेरी चांदनी है बिखरी हुई

 

तेरी चांदनी है बिखरी हुईjhuma teri chandni hai bikhri hui
खुशबू-ए-यार है बिखरी हुई

बहा जाए दरिया-ए-वक़्त
उम्र-ए-इश्क है ठहरी हुई

कभी चैन आये जो देखूं
जान ये बाकी है सिमटी हुई

कोई नूर आया घर में कहाँ
अब शमा है धुंधली हुई

इन उम्मीदों का शुक्रिया है
रूह-ए-‘दस्तकार’ है तेरी हुई

 

তেরী চাংদনী হৈ বিখরী হুঈ
খুশবূ-এ-যার হৈ বিখরী হুঈ

বহা জাএ দরিযা-এ-ব্ত
উম্র-এ-ইশ্ক হৈ ঠহরী হুঈ

কভী চৈন আযে জো দেখূং
জান যে বাকী হৈ সিমটী হুঈ

কোঈ নূর আযা ঘর মেং কহাঁ
অব শমা হৈ ধুংধলী হুঈ

ইন উম্মীদোং কা শুক্রিযা হৈ
রূহ-এ-‘দস্তকার’ হৈ তেরী হুঈ

 

teri chandni hai bikhri hui
khushboo-e-yaar hai bikhri hui

baha jaaye dariya-e-waqt
umr-e-ishq hai tahri hui

kabhi chain aaye jo dekhoon
jaan ye baki hai simti hui

koi noor aaya ghar me kahan
ab shama hai dhoondh'li hui

in ummedon ka shukriya hai
ruuh-e-dastakaar hai teri hui

© Bharat Tiwari (All rights reserved)

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहा जाए दरिया-ए-वक़्त
    उम्र-ए-इश्क है ठहरी हुई...waah

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  2. रश्मि दीदी चरणस्पर्श... आशीर्वाद ज़रूर दीजियेगा

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  3. dile naadan tujhe hua kya hai,
    in ansuaon ki dawa kya hai

    उत्तर देंहटाएं

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