27/6/11

अब ना जायो छोड़ के / अब रहियो दिल जोड़ के


Faith
ये उसकी रहमत का फलसफ़ा है हम जो कहते हैं
ये उसका ही करम है जो फ़रिश्ते दोस्त बनते हैं...


मेरे निज़ाम का रुतबा यहाँ पर सब से ऊँचा है
मेरे निज़ाम मे देखो खुदा हम सब का रहते है...


जो मांगो तो सुने तुम्हरी
जो मानो तो सुने तुम्हरी
जो देखो तो सुने तुम्हरी
जो सोंचो तो सुने तुम्हरी


ना माँगा मैंने ज्यादा, सिवा जलवागिरी के कुछ
सिखाया उसने ये मुझको के इंसान कैसे बनते हैं...


जो मांगो देत हैं दामन
जो मानो देत हैं खुशियाँ
जो देखो देत हैं दर्शन
जो सोंचो देत हैं जन्नत


तुम मानो या ना मानो सच बदला नहीं करता
मैंने माना के वो ही हैं, जो हर शय मे बसते हैं...


पिया बसत हैं नयनन मे
पिया दिखत हैं मूरत मे
पिया की सुरतिया काबा मे
पिया हैं हमरे तन मन मे


तू अपनी बंद आँख खोल, एक बार जाग तो तू
तू जा दर पे उसकी, देख के आशिक वो निकलते हैं…


अब ना जायो छोड़ के
अब रहियो दिल जोड़ के
अब हम तुम्हरे आशिक हैं
अब तुम्ही तो मालिक हो


मेरे रुतबे, मेरी मैं का हर इक ज़र्रा तुझी से  है
रूह-ए-'दस्तकार' मे बस निज़ाम साईं ही रहते हैं…

======================================

ye uski rahmat ka falsafa hai ham jo kahate hain 
ye uska hi karam hai jo farishte dost bante hain...

mere nizaam ka rutba yahan par sab se ooncha hai
mere nizaam me dekho khuda ham sab ka rahate hai...

jo maango to sune tumhari
jo maano to sune tumhari
jo dekho to sune tumhari
jo soncho to sune tumhari

na maanga mainne jyada, siva jalavagiri ke kuch
sikhaya usane ye mujh'ko ke insan kaise bante hain...

jo maango det hain daman
jo maano det hain khushiyan
jo dekho det hain darshan
jo soncho det hain jannat

tum maano ya na maano sach badala nahin karta
mainne mana ke vo hi hain, jo har shiy me baste hain...

piya basat hain naynan me
piya dikhat hain moorat me
piya ki suratiya kaba me
piya hain hamre tan man me 

tu apni band aankh khol, ek baar jaag to tu
tu ja dar pe uski, dekh ke aashik vo nikalte hain

ab na jayo chhod ke
ab rahiyo dil jod ke
ab ham tumhare aashiq hain
ab tumhi to malik ho

mere rutabe, meri main ka har ik zarra tujhi se hai
ruh-e-'dastakar' me bas nizaam sai hi rahate hain

1 टिप्पणी:

  1. मेरे रुतबे, मेरी 'मैं' का हर इक ज़र्रा तुझी से है
    रूह-ए-'दस्तकार' मे बस निज़ाम साईं ही रहते हैं...................

    tum maano ya na maano sach badala nahin karta
    mainne mana ke vo hi hain, jo har shiy me baste hain.............aapki kalam ko salaam Bharat ji ...OSN!!!

    उत्तर देंहटाएं

स्वागत है

नेटवर्क ब्लॉग मित्र