25/10/11

Abki Jo Deep Jalen / अबकी जो दीप जलें

8 टिप्‍पणियां:

  1. Bharat Bhai.. aapne Apni Kavita k Madhyam Se Desh Ko Ek Nayi Disha Dene Ki Bhagirath Prayas Kiya Hai,, Jo Atyant sarahniya Hai.. Sachchi Diwali K Arth Aapki Kavita Me samahit Hain... Aap samast Parivar Ko Prakashparv Deepavali Ki Mangalkamna evam Badhai.

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  2. ये सोच और प्रस्तुति किसी नेक दिल इंसान के अंदर से ही निकल सकती है ,बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाये ,

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  3. ऐसी जो दिवाली हो, दुनिया खूबसूरत हो जाए। आपकी कामना में अपनी प्रार्थना जोड़ते हैं। ज्योतिपर्व की हार्दिक शुभकामना .

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