31-1-11

प्रभाव Prabhav

2 टिप्‍पणियां:
क्यों बना रहे हो
रिश्ते अजीब

किसके दबाव तले

दोषी हो
हृदय को आरोपित कर
खिलौना बन मस्तिष्क का
विष घोल रहे तुम

प्रभावित करते सम्पूर्ण विश्व को

Kyon bana rahe ho
Rishte ajeeb

Kiske dabaw tale

Doshi ho
Hridaiy ko aaropit kar
Khilauna ban mastisk ka

Vish ghol rahe tum

Prabhawit karte sampurn vishwa ko


Bharat
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27-1-11

तलाश वज़ूद की . . . .

4 टिप्‍पणियां:

dastakaar bharat tiwari भारत भरत तिवारी

 

टटोल के तुमने
पा ही लिया
मेरा मैं

मैं तो
ना खोज पाया था
तुमने कैसे पाया

पवन हो क्या
पतली सी झीरी
खिड़की में हो
गर्म
सर्द
सी तुम
आ ही जाती हो

तुमने पर्दा भी ना रखा
सामने मेरे
जैसे आइना
वैसे ही

आया करो
एक बार ठहर भी जाओ
मुझे देखना है
झांकना है
या
सच ये है
जानना चाहता हूँ अब खुद को


... भरत तिवारी
२७/०१/२०११
नई दिल्ली

26-1-11

Vishwagaan وشوگان विश्वगान বিশ্বগান ਵਿਸ਼੍ਵਗਾਨ

2 टिप्‍पणियां:
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مسکان ہوا میں ذرا سی ڈالو
تم کو ملے گا سلام ہمارا


سب کی ہے یہ نیلی چھتری
نام کچھ نہیں اور ہمارا



جدا بھلا اب کوئی کیسے کرے گا
عشق جو بنا ہے مذہب ہمارا

آج کے تو ہم نہیں ہیں
صدیوں کا ہے ملن ہمارا

حصّے کی گر کرے بات کوئی
بول دینا کے ہر شے ہے ہمارا

چوٹیں کھائیں ہیں ہم نے ہزاروں
زخم ٹکتا نہیں ہمارا


ایک ہونے کا لطف لو بھارت
ملو گاؤ وشوگان ہمارا



মুস্কান হবা মেং রা সী ডালো
মিলেগা তুমকো সলাম হমারা

সব কী হৈ যে নীলী ছতরী
নাম কুছ নহীং ঔর হমারা

জুদা ভলা অব কোঈ কৈসে করেগা
ইশ্ক জো বনা হৈ মহব হমারা 

আজ কে তো হম নহীং হৈং
সদিযোং কা হৈ মিলন হমারা

হিস্সে কী গর করে বাত কোঈ
বোল দেনা কি হর শৈ হৈ হমারা

চোটেং খাঈ হৈং হমনে হজারোং
খ্ম টিকতা নহীং হমারা

এক হোনে কা লুত লো ‘ভরত’
মিলো গাও বিশ্বগান হমারা
------
ਮੁਸ੍ਕਾਨ ਹਵਾ ਮੇਂ ਜਰਾ ਸੀ ਡਾਲੋ
ਮਿਲੇਗਾ ਤੁਮਕੋ ਸਲਾਮ ਹਮਾਰਾ

ਸਬ ਕੀ ਹੈ ਯੇ ਨੀਲੀ ਛਤਰੀ
ਨਾਮ ਕੁਛ ਨਹੀਂ ਔਰ ਹਮਾਰਾ

ਜੁਦਾ ਭਲਾ ਅਬ ਕੋਈ ਕੈਸੇ ਕਰੇਗਾ
ਇਸ਼੍ਕ ਜੋ ਬਨਾ ਹੈ ਮਹਬ ਹਮਾਰਾ 

ਆਜ ਕੇ ਤੋ ਹਮ ਨਹੀਂ ਹੈਂ
ਸਦਿਯੋਂ ਕਾ ਹੈ ਮਿਲਨ ਹਮਾਰਾ

ਹਿਸੇ ਕੀ ਗਰ ਕਰੇ ਬਾਤ ਕੋਈ
ਬੋਲ ਦੇਨਾ ਕਿ ਹਰ ਸ਼ੈ ਹੈ ਹਮਾਰਾ

ਚੋਟੇਂ ਖਾਈ ਹੈਂ ਹਮਨੇ ਹਜਾਰੋਂ
ਜਖਮ ਟਿਕਤਾ ਨਹੀਂ ਹਮਾਰਾ

ਏਕ ਹੋਨੇ ਕਾ ਲੁਤ੍ਫ਼ ਲੋ ‘ਭਰਤ’
ਮਿਲੋ ਗਾਓ ਵਿਸ਼੍ਵਗਾਨ ਹਮਾਰਾ
-------

मुस्कान हवा में ज़रा सी डालो
मिलेगा तुमको सलाम हमारा

सब की है ये नीली छतरी 
नाम कुछ नहीं और हमारा

जुदा भला अब कोई कैसे करेगा 
इश्क जो बना है मज़हब हमारा 

आज के तो हम नहीं हैं 
सदियों का है मिलन हमारा

हिस्से की गर करे बात कोई 
बोल देना कि हर शै है हमारा

चोटें खाई हैं हमने हजारों
ज़ख्म टिकता नहीं हमारा

एक होने का लुत्फ़ लो भरत
मिलो गाओ विश्वगान हमारा
------------
Muskaan Hawa Men Zara Si Daalo
Milega Tumko Salam Hamaara

Sab Ki Hai Ye Neeli Chhatri
Naam Kuch Nahin Aur Hamaara

Juda Bhala Ab Koi Kaise Karega
Ishq Jo Bana Hai Mazhab Hamaara

Aaj Ke To Ham Nahin Hain
Sadiyon Ka Hai Milan Hamaara

Hisse Ki Gar Kare Baat Koi
Bol Dena Ki Har Shai Hai Hamaara

Choten Khaai Hain Hamne Hazaron
Zakhm Tikta Nahin Hamara

Ek Hone Ka Lutf Lo ‘Bharat’
Milo Gao Vishwagaan Hamaara




© Bharat Tiwari All rights reserved


25-1-11

गुलाबी

4 टिप्‍पणियां:

आज आसमान को देख के
थोड़ा मुस्कुरा देना
वो नीला रंग
तुम्हे कुछ और गुलाबी कर छोड़ेगा

अपनी आँखों से कहना ,
देखें मेरी आँखों से तुम्हे
देखना सारी दुनिया 
तुम्हे 
तुम सी ही दिखेगी


पानी सा मेरा जिस्म , पसीने से तर ब तर
आओगे तुम तो सावन कुछ सुकून देगा


मेरी ख्वाहिश के साया मुझे तुम्हारा मिले
कुदरत से ये करिश्मा
मेरी किस्मत करा लेगी 





aaj aasmaan ko dekh ke
thoda muskura dena
wo neela rang
tumhe kuch aur gulabi kar chhodega


apni aankhon se kahana ,
dekhen meri aankhon se tumhe
dekhna saari duniya 
tumhe 
tum si hi dikhegi


pani sa mera jism , pasine se tar b tar
aaoge tum to savan kuch sukoon dega


meri khwahish ke saya mujhe tumhara mile
kudarat se ye karishma
meri kismat kara legi

22-1-11

Hua Ishq Hai Jaise Chaand Ko Chaandni Se / हुआ इश्क है जैसे चाँद को चाँदनी से

2 टिप्‍पणियां:

hua ishq hai jaise chaand ko chaandni se






Hua Ishq  Hai  Jaise  Chaand  Ko  Chaandni Se
Aap  Aaye  Hain  Kuch  Is  Tarah  Zindagi  Men
Na Jaane Kab Se Talash’ta Raha Main Khud Ko
Mila   Ab , Jab  Aaye   Hain  Aap  Zindagi  Men
Aati   Rahi   Hain    Aapki    Dastaken   Dil    Pe
Ye Ban Gayi Hain Dhad’kane, Meri Zindagi Men
Aao   Hamen   Ek   Baar   Karo   Fir  Se   Ghayal
Purane Ghaav  To  Bhar  Gaye  Ab  Zindagi  Men
Khol   Pinjra   Karo  Band  Parinda- E - Bharat
Ye   Chaman  Na  Bhayega  Ab  Is  Zindagi   Men


© Bharat Tiwari … all rights reserved

19-1-11

Tera Shukriya / तेरा शुक्रिया . . .

1 टिप्पणी:

Tera Shukriya

 


क्या है ,के बेवजह खून बहा जाते हैं, ये मुर्दे...
क्या तू जगा रहा है हम नींद में डूबों को...
क्या तूने ठानी है के अबके खुद ना आयेगा..
क्या तूने अजमाइश में रखा है अपने बन्दों को...

तेरे जहान में होली ये खून की भला क्यों कर...
तेरे मासूम बच्चों को लावारिशी भला क्यों कर...
तेरे घर में मेरे घर में ये खौफ भला क्यों कर...
तेरे दरख्त से साया तेरा ही दूर भला क्यों कर...
क्या तू उड़ने देगा ना आज़ाद, अपने ही परिंदों को...

तय किया तुने,ये है वक्त अजमाइश का...
तय किया मैंने भी दफ्न मुर्दों को करने का...
तय किया अश्क-ए-अत्फाल बहने ना देने का...
तय है दिखा दूंगा तेरा जलवा इस ज़माने को...
क्या ही सोने दूंगा अब,
ज़माने के बेफिक्र-ओ-अनजानों को...

ये जानता हूँ तू ही सिखा रहा है मुझे...
ये ताकत-ए-कलम तुने ही दी है मुझे...
ये अलग बात दिखता नहीं तू है मुझे...
ये जंग तू लड़ेगा,और जितायेगा मुझे...
ये तेरा ही करम के भरम नहीं है मुझे...

तेरा शुक्रिया के निगाह दी...
तुने अपने जहान में पनाह दी...
की अता ‘भरत’ को ताकतें...
और दिमाग को सही राह दी.
......भरत ५/.७/२०१०

फेसबुक पर ...

Kya Hai, Ke Be’wajah Khoon Baha Dete Hain, Ye Murde…
Kya Tu Jaga Raha Hai Hum Neend Me Doobon Ko…
Kya Tu’ne Thani Hai Ke Abke Khud Na Aayega…
Kya Tu’ne Aajmaaish Me Rakha Hai Apne Bandon Ko…

Tere Jahan Me Holi Ye Khoon Ki Bhala Kyon Kar…
Tere Masoom Bach’hon Ko Lawarishi Bhala Kyon Kar…
Tere Ghar Me Mere Ghar Me Ye Khouf Bhala Kyon Kar…
Tere Dar’kh’t Se Saya Tera Hi Door Bhala Kyon Kar…
Kya Tu Udd’ne Dega Naa Aazad, Apne Hi Parindon Ko…

Tai Kiya Tuune, Ye Waqt Ajmaaish Ka…
Tai Kiya Maine Bhi Dafn Murdon Ko Karne Ka…
Tai Kiya Ashk-e-Atfaal Bahne Naa Dene Ka…
Kya Hii Sone Doonga Ab,
Jamane Ke Be’fikr-o-Anjaano Ko..
Ye Jaanta Hoon Tu Hi Sikha Raha Hai Mujhe…
Ye Taqat-e-Kalam Tuune Hi Di Hai Mujhe…
Ye Alag Baat Dikh’ta Nahin Tuu Hai Mujhe…
Ye Jang Tu Ladega Aur Jita’ye’ga Mujhe…
Ye Tera Hi Karam Ke Bharam Nahin Hai Mujhe…

Tera Shukriya Ke Nigah Dii…
Tune Apne Jahan Me Panah Di…
Ki Ata ‘Bharat’ Ko Taaqat’en…
Aur Dimaag Ko Sahi Rah Di

…. Bharat 5/6/2010

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Tera Pata तेरा पता

कोई टिप्पणी नहीं:
मालूम तो चला
तब
जब बारिश रुकी ...

जेब टटोली 
कागज से वो हर्फ़
धुल गए थे

तेरा पता लिखा था जिसमे...भरत

Maaloom To Chala
Tab
Jab Barish Ruki ...

Jeb Tatoli
Kaagaj Se Vo Harf
Dhul Gaye The

Tera Pata Likha Tha Jisme...bharat

17-1-11

सात दिन में / Saat Din Men

2 टिप्‍पणियां:

 

ऐसे कहाँ छूने को हुआSaat Din Men : Bharat Tiwari
छिल दि
आत्मा
की खाल

उजाड़ दिया
सात दिन में
सात जन्मो का सपना

इंसान गये कहाँ
पृथ्वी से
भगवान तो नदारद ना थे

तुरुपाई करके
दुरुस्त की खाल
उन्मुक्तता जाती रही

बेचारा दिल
अब
बेमौत
जिन्दा लाश…

भरत तिवारी १७/०१/२०११ नयी दिल्ली

 

Aise Kahan Chhoone Ko Hua
Chhil Di
Aatma
Ki Khal

Ujaad Diya
Saat Din Men
Saat Janmo Ka Sapna

Insan Gaye Kahan
Prithvi Se
Bhagawaan To Nadarad Na The

Turupaai Kara’ke
Durust Ki Khal
Unmukt’ta Jaati Rahi

Bechaara Dil
Ab
Bemout
Zinda Laash…

Bharat Tiwari 17/01/2011 New Delhi

13-1-11

राकेश श्रीमाल ~ जब होंठ ही बन जाते हैं कान तुम्हारे

1 टिप्पणी:
“इन्सिदेन्ट्स ऑफ कलर्स एंड प्लेन्स “ 
रोमोलो रोमानी की चित्रकला हस्तनिर्मित तेल चित्रकलाप्रजन


राकेश श्रीमाल की हमेशा की तरह खूबसूरत कविता 
पराकाष्ठा के आसपास का रोमान्स 
कुछ पल लगते हैं .... अलसाई दोपहर में .... होंठों के कानों को / सही है शब्दकोश में कहाँ ये शब्द मिलते है .... 
कुछ लोग तो इसे केमेस्ट्री भी कहते हैं ...... रस पान करें ... सादर भरत तिवारी  




व्यर्थ लगते हैं
दुनिया के सारे शब्दकोष

हँसी आती है
समस्त महान रचनाओं
और उसके रचयिताओं पर

अलबत्ता खुशबु बिखेरते फूल
अपनी ईमानदार चुप्पी मैं
भले लगते हैं हवा की तरह

किसी मौसम की
अलसाई दोपहर मैं
कुछ पल लगते हैं मुझे
वह सब बताने
जिसके लिए नहीं बने अभी शब्द

मेरे होंठ
बहुत सलीके से कहते हैं
तुम्हारे होंठो के कानो को
वह सब कुछ
जो कहना चाहता हूँ तुम्हे..

राकेश श्रीमाल

राख

1 टिप्पणी:
राख

तुम्हारे अन्तर की
उड़ के
घट को मेरे
अंकवार कर गयी

मौन की भाषा
बोलता
सुनता
मैं

राख से शब्द
भर गये
और
मौन मूक सा
इधर उधर
अन्धक हो
अन्धक से विस्मय

भरत १३/०१/२०१० नयी दिल्ली

9-1-11

एक रोशनी ने बुझते हुए बोला

1 टिप्पणी:
एक रोशनी  ने बुझते हुए बोला
सो  जा, के रात  बहुत लम्बी है
वो चिराग  मजारों पे जलते  हैं 
'भरत' तेरी उम्र  बहुत लम्बी है
Ek Roshni Ne Bujhnte Hue Bola
So Ja, Ke Raat Bahut Lambi Hahi...
Wo Chirag Majaron Pe Jalte Hain
'Bharat' Teri Umr Bahut Lambi Hai...

8-1-11

मुद्दाविहीन मुद्दे पर...

2 टिप्‍पणियां:

कुछ तो
लिखना ही था..

मुद्दाविहीन मुद्दे पर
सम्पादक ने नोटिस जो दी थी..

कुछ सोया
कुछ पाया
सपने !

अजीब होते हैं
सपने
कभी कभी
सर ना पैर

आज का सपना
अजीब सपनो
की डाल से टपका

आज ही आना था
चलो...
इसी बहाने लेखक तो बना
.......................................
सादर भरत (राकेश श्रीमाल जी को समर्पित)


ओस

कोई टिप्पणी नहीं:
इन 
सर्द 
हवाओं में
इन नर्म 
फिजाओं में

गर्मी 
तेरे ओस की

आती है 
दुआओं में 
...............................................भरत
In 
Sard 
Hawaon Me
In Narm 
Fizaon Me

Garmi 
Tere Os Ki

Aati Hai 
Duaon Me

.................…bharat

4-1-11

Kahan Kahan Se Mohabbat Aayi / कहाँ कहाँ से मोहब्बत आयी

3 टिप्‍पणियां:
कहाँ कहाँ से मोहब्बत आयी
हमारे दिल में समाने आयी...

रहा था करता तनहा वीरान
क्या बहार क्या फिजाएँ आयी...

दिखाई अदायें खुदा ने अपनी
असल खुदाई नज़र में आयी...

गज़ले-ए-कुदरत आसमाँ वाली
साज़ बनी है जमीं पे आयी...

सोने को होना था तुमको ‘भरत’
नींद की परियां ही बस ना आयी...

Kahan Kahan Se Mohabbat Aayi
Hamare Dil Men Samaane Aayi...

Raha Tha Karta Tanha Veeran
Kya Bahaar Kya Fizaen Aayi...

Dikhaai Adayen Khuda Ne Apani
Asal Khudaai Nazar Men Aayi...

Gajale-E-Kudarat Aasmaan waali
Saaz Bani Hai Jamin Pe Aayi...

Sone Ko Hona Tha Tumko ‘Bharat’
Nind Ki Pariyan Hi Bas Na Aayi...

(C) Bharat Tiwari All right reserved 

3-1-11

ये जो जी रहे हो

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Ye jo ji rahe ho
Bas ye hi ji rahe ho…


Khol do bandhan
Kyon yon mar rahe ho…


Kab raat nahin aati
ke yon dar gaye ho…


subah bhi aayegi
kyon so rahe ho … Bharat


ये जो जी रहे हो
बस ये ही जी रहे हो...




खोल दो बंधन
क्यों यों मर रहे हो...


कब रात नहीं आती
के यों डर गए हो ...


सुबह भी आयेगी
क्यों सो रहे हो ... भरत

2-1-11

दीपमहल

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भरत तिवारी की तीन रचनाएँ

1 टिप्पणी:

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Baarish Ko Dekhte Ho

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Kahin To Sawan To Nahin

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Aagosh

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Gam Ka ilaaz Karane Gaye

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Puarana Almbum Aaya

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क्या खोजना उसे?

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उसे हिन्दी पर ही मोह आता है

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जीने की वज़ह तलाश रहा हूं मैं

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जीने की वज़ह तलाश रहा हूं मैं
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तुमने भरी मुस्कान जिन हवाओं में

1 टिप्पणी:


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