19-3-11

होली गीत

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होली गीत
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15-3-11

Us'ke Aks Se Bahak Jata Hoon / उसके अक्स से बहक जाता हूँ

1 टिप्पणी:

उसके अक्स से बहक जाता हूँ
उससे रूबरू हो महक जाता हूँ...
उसका दरबार मेरी जन्नत है
जाऊं ना उधर तो थक जाता हूँ ...
उसका मिलना पिघलना मेरा
उसको देख भर दहक जाता हूँ ...
उससे ही मेरी साँसे चलती है
उसकी आहट से चहक जाता हूँ...
उसके पाँव की धुल भी सोना है
उन्ही निशानों पर रुक जाता हूँ...

Us'ke Aks Se Bahak Jata Hoon
Usse Rubaru Ho Mahak Jata Hoon...
Uska Darabaar Meri Jannat Hai
Jaa’oon Na Udhar To Thak Jata Hoon ...
Uska Milna Pighalna Mera
Us’ko Dekh Bhar Dahak Jata Hoon ...
Us’se Hi Meri Saanse Chalti Hain
Us’ki Aahat Se Chahak Jata Hoon...
Us’ke Paanv Ki Dhul Bhi Sona Hai
Unn’hi Nishanon Par Ruk Jata Hoon...


Us'ke Aks Se Bahak Jata Hoon / उसके अक्स से बहक जाता हूँ
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4-3-11

jaane kaise rah gaya / जाने कैसे रह गया / ਜਾਨੇ ਕੈਸੇ ਰਹ ਗਿਆ / جانے کیسے رہ گیا

3 टिप्‍पणियां:

wo khat

na jaane kab aaya tha

tareekh bhi nahin padi hai

aur mila bhi
wahan us kamre men
jahan bachpan se baahar aaya tha main

16 saal to ho hi gaye honge
jaane kaise rah gaya , khola tak nahin

aaj milne ka kuch makasad to tha
padte hi ,jagjeet ki yad aayi, ke "dene waale mujhe maujon ki.."

khair un dinon ko de gaya wo khat
aur samhala hai ab aise
jaise likhne wala khud mil gaya ho
aur wapas mere kandhe pe apna haath haule se rakh bola ho ki scooter dheere chalao

..bharat


वो खत 

ना जाने कब आया था

तारीख भी नहीं पड़ी है

और मिला भी
वहाँ उस कमरे में
जहाँ बचपन से बाहर आया था मैं

१६ साल तो हो ही गये होंगे
जाने कैसे रह गया , खोला तक नहीं

आज मिलने का कुछ मकसद तो था 
पड़ते ही ,जगजीत की याद आयी, के "देने वाले मुझे मौजों की.."

खैर उन दिनों को दे गया वो खत 
और सम्हाला है अब ऐसे 
जैसे लिखने वाला खुद मिल गया हो 
और वापस मेरे कन्धे पे अपना हाथ हौले से रख बोला हो कि स्कूटर धीरे चलाओ
..भरत


ਵੋ ਖਤ

ਨਾ ਜਾਨੇ ਕਬ ਆਇਆ ਥਾ

ਤਾਰੀਖ ਭੀ ਨਹੀਂ ਪੜੀ ਹੈ

ਔਰ ਮਿਲਾ ਭੀ
ਵਹਾਁ ਉਸ ਕਮਰੇ ਮੇਂ
ਜਹਾਁ ਬਚਪਨ ਸੇ ਬਾਹਰ ਆਇਆ ਥਾ ਮੈਂ

੧੬ ਸਾਲ ਤੋ ਹੋ ਹੀ ਗਏ ਹੋਂਗੇ
ਜਾਨੇ ਕੈਸੇ ਰਹ ਗਿਆ, ਖੋਲਾ ਤਕ ਨਹੀਂ

ਆਜ ਮਿਲਨੇ ਕਾ ਕੁਛ ਮਕਸਦ ਤੋ ਥਾ
ਪੜ੍ਹਤੇ ਹੀ ,ਜਗਜੀਤ ਕੀ ਯਾਦ ਆਈ, ਕਿ "ਦੇਨੇ ਵਾਲੇ ਮੁਝੇ ਮੌਜੋਂ ਕੀ.."

ਖੈਰ ਉਨ ਦਿਨੋਂ ਕੋ ਦੇ ਗਿਆ ਵੋ ਖਤ
ਔਰ ਸੰਭਾਲਾ ਹੈ ਅਬ ਐਸੇ
ਜੈਸੇ ਲਿਖਨੇ ਵਾਲਾ ਖੁਦ ਮਿਲ ਗਿਆ ਹੋ
ਔਰ ਵਾਪਸ ਮੇਰੇ ਕੰਧੇ ਪੇ ਅਪਨਾ ਹਾਥ ਹੌਲੇ ਸੇ ਰਖ ਬੋਲਾ ਹੋ ਕਿ ਸ੍ਕੂਟਰ ਧੀਰੇ ਚਲਾਓ
..ਭਰਤ

وہ خط

نہ جانے کب آیا تھا

تاریخ بھی نہیں پڑی ہے

اور ملا بھی
وہاں اس کمرے میں
جہاں بچپن سے بہار آیا تھا میں

١٦ سال تو ہو ہی گئے ہونگے
جانے کیسے رہ گیا , کھولا تک نہیں

آج ملنے کا کچھ مقصد تو تھا
پڑھتے ہی ,جگجیت کی یاد آی, کے "دینے والے مجھے موجوں کی.."

خیر ان دنوں کو دے گیا وہ خط
اور سمھلا ہے اب ایسے
جیسے لکھنے والا خود مل گیا ہو
اور واپس میرے کندھے پر اپنا ہاتھ ہولے سے رکھ بولا ہو کے سکٹر 
دھیرے چلاؤ

بھرت .......
URDU / PUNJABI Translation courtsey Shri Yograj Prabhakar Bhai... 

1-3-11

तुम मेरे माज़ी मेरे आज मेरे कल हो / Tum mere maazi mere aaj mere kal ho

2 टिप्‍पणियां:

तुम मेरे माज़ी मेरे आज मेरे कल हो
तुम ही मेरी हर आरज़ू की शक्ल हो

 
तुम में रब ने खुद अपने को बसाया
तुम ही मेरी जिंदगी के हसीन पल हो

तुम ही मंदिर की मूरत, सूरत-ऐ-खुदा हो
तेरा दर ही जन्नत, एक तुम ही असल हो

तुम ही से है ये दुनिया तुम से ही आसमां है
तुम मालिक-ऐ-आलम बस तुम ही अज़ल हो

मेरी रूह में हो तुम मेरी धड़कने भी तुम हो
तुम ही तो 'भरत' के आसमान का बादल हो 


 

Tum mere maazi mere aaj mere kal ho
Tum hi Meri Har Aarzoo Ki Shakl Ho...

Tum me rab ne khud apne ko basaya
Tum hi meri zindagi ke haseen pal ho...

Tum hi mandir Ki Muurat, Suurat-e-Khuda Ho
Tera Dar Hi Jannat, Ek tum hi Asal ho...

Tum Hi se Hai Ye Duniya Tum Se hi Aasmaan Hai
Tum Maalik-e-Aalam bas tum hi  azal* ho...

Meri Rooh Me Ho Tum Meri Dhadkane Bhi Tum Ho
Tum hi to 'Bharat' ke aasmaan ka baadal ho..


*azal/अज़ल  = existence from eternity

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