29-6-11

सुने ज़रा sune zara 29/6/2011

1 टिप्पणी:

main kahan kahan khoojoon tumko

Main kahan kahan khojoon tumko
Jab bhi talashta hoon
dhadkane tej ho ke tumhara pata bata deti hain... Bharat

27-6-11

अब ना जायो छोड़ के / अब रहियो दिल जोड़ के

1 टिप्पणी:

Faith
ये उसकी रहमत का फलसफ़ा है हम जो कहते हैं
ये उसका ही करम है जो फ़रिश्ते दोस्त बनते हैं...


मेरे निज़ाम का रुतबा यहाँ पर सब से ऊँचा है
मेरे निज़ाम मे देखो खुदा हम सब का रहते है...


जो मांगो तो सुने तुम्हरी
जो मानो तो सुने तुम्हरी
जो देखो तो सुने तुम्हरी
जो सोंचो तो सुने तुम्हरी


ना माँगा मैंने ज्यादा, सिवा जलवागिरी के कुछ
सिखाया उसने ये मुझको के इंसान कैसे बनते हैं...


जो मांगो देत हैं दामन
जो मानो देत हैं खुशियाँ
जो देखो देत हैं दर्शन
जो सोंचो देत हैं जन्नत


तुम मानो या ना मानो सच बदला नहीं करता
मैंने माना के वो ही हैं, जो हर शय मे बसते हैं...


पिया बसत हैं नयनन मे
पिया दिखत हैं मूरत मे
पिया की सुरतिया काबा मे
पिया हैं हमरे तन मन मे


तू अपनी बंद आँख खोल, एक बार जाग तो तू
तू जा दर पे उसकी, देख के आशिक वो निकलते हैं…


अब ना जायो छोड़ के
अब रहियो दिल जोड़ के
अब हम तुम्हरे आशिक हैं
अब तुम्ही तो मालिक हो


मेरे रुतबे, मेरी मैं का हर इक ज़र्रा तुझी से  है
रूह-ए-'दस्तकार' मे बस निज़ाम साईं ही रहते हैं…

======================================

ye uski rahmat ka falsafa hai ham jo kahate hain 
ye uska hi karam hai jo farishte dost bante hain...

mere nizaam ka rutba yahan par sab se ooncha hai
mere nizaam me dekho khuda ham sab ka rahate hai...

jo maango to sune tumhari
jo maano to sune tumhari
jo dekho to sune tumhari
jo soncho to sune tumhari

na maanga mainne jyada, siva jalavagiri ke kuch
sikhaya usane ye mujh'ko ke insan kaise bante hain...

jo maango det hain daman
jo maano det hain khushiyan
jo dekho det hain darshan
jo soncho det hain jannat

tum maano ya na maano sach badala nahin karta
mainne mana ke vo hi hain, jo har shiy me baste hain...

piya basat hain naynan me
piya dikhat hain moorat me
piya ki suratiya kaba me
piya hain hamre tan man me 

tu apni band aankh khol, ek baar jaag to tu
tu ja dar pe uski, dekh ke aashik vo nikalte hain

ab na jayo chhod ke
ab rahiyo dil jod ke
ab ham tumhare aashiq hain
ab tumhi to malik ho

mere rutabe, meri main ka har ik zarra tujhi se hai
ruh-e-'dastakar' me bas nizaam sai hi rahate hain

24-6-11

ना मर जायें / na mar jaayeN / ,না মর জাযেং

1 टिप्पणी:

Click to Read

 

Abhi ham haiN  aa dekh le ,na mar jaayeN kahiN
Kuch ajab haiN  ye dhadakne, na mar jaayeN kahiN...

Itne dardon ne hai basera is dil me kiya
Lag raha aaj ghut ke, na mar jaayeN kahiN...

Kahata hai vo bas baat din do char ki hai
Nahin ye sonchta sun ke, na mar jaayeN kahiN...

Kar ke raushan kyon usne veeran dil ko
Ab hai chhoda andhere me, na mar jaayeN kahiN...

Uski aankhon ke mai’khane ka sharabi hoon maiN
Subah hone ko hai pila de, na mar jaayeN kahiN...

Dekh tamasha-e zaindagi hai 'bharat' do pal ka
Itna haiN  sochte aap ke, na mar jaayeN kahiN...


 

অভী হম হৈ আ দেখ লে ,না মর জাযেং কহীং
কুছ অজব হৈং যে ধডকনে, না মর জাযেং কহীং...

ইতনে দর্দোং নে হৈ বসেরা ইস দিল মে কিযা
লগ রহা আজ ঘুট কে, না মর জাযেং কহীং...

কহতা হৈ বো বস বাত দিন দো চার কী হৈ
নহীং যে সোংচতা সুন কে, না মর জাযেং কহীং ...

কর কে রৌশন ক্যোং উসনে বীরান দিল কো
অব হৈ ছোডা অঁধেরে মে, না মর জাযেং কহীং ...

উসকী আঁখোং কে মযখানে কা শরাবী হূঁ মৈং
সুবহ হোনে কো হৈ পিলা দে, না মর জাযেং কহীং ...

দেখ তমাশা-এ িংদগী হৈ 'ভরত' দো পল কা
ইতনা হৈং সোচতে আপ কে, না মর জাযেং কহীং ...

- - - - - - - - - - - - - - - - - -

नज़्म : ना मर जायें (भरत तिवारी ‘दस्तकार’)
छायाचित्र : वुमन पेन (झूमा मजूमदार)
© सर्वाधिकार सुरक्षित
ন্ম : না মর জাযেং (ভরত তিবারী ‘দস্তকার’)
ছাযাচিত্র : বুমন পেন (ঝূমা মজূমদার)
© সর্বাধিকার সুরক্ষিত
Nazm: Na mar jaayeN kahiN (Bharat Tiwari ‘ Dastakaar”)
Painting: Woman Pain (Jhuma Majumder)
© All rights reserved

21-6-11

तेरी चांदनी है बिखरी हुई

3 टिप्‍पणियां:

 

तेरी चांदनी है बिखरी हुईjhuma teri chandni hai bikhri hui
खुशबू-ए-यार है बिखरी हुई

बहा जाए दरिया-ए-वक़्त
उम्र-ए-इश्क है ठहरी हुई

कभी चैन आये जो देखूं
जान ये बाकी है सिमटी हुई

कोई नूर आया घर में कहाँ
अब शमा है धुंधली हुई

इन उम्मीदों का शुक्रिया है
रूह-ए-‘दस्तकार’ है तेरी हुई

 

তেরী চাংদনী হৈ বিখরী হুঈ
খুশবূ-এ-যার হৈ বিখরী হুঈ

বহা জাএ দরিযা-এ-ব্ত
উম্র-এ-ইশ্ক হৈ ঠহরী হুঈ

কভী চৈন আযে জো দেখূং
জান যে বাকী হৈ সিমটী হুঈ

কোঈ নূর আযা ঘর মেং কহাঁ
অব শমা হৈ ধুংধলী হুঈ

ইন উম্মীদোং কা শুক্রিযা হৈ
রূহ-এ-‘দস্তকার’ হৈ তেরী হুঈ

 

teri chandni hai bikhri hui
khushboo-e-yaar hai bikhri hui

baha jaaye dariya-e-waqt
umr-e-ishq hai tahri hui

kabhi chain aaye jo dekhoon
jaan ye baki hai simti hui

koi noor aaya ghar me kahan
ab shama hai dhoondh'li hui

in ummedon ka shukriya hai
ruuh-e-dastakaar hai teri hui

© Bharat Tiwari (All rights reserved)

17-6-11

ब्लैक एंड व्हाइट

2 टिप्‍पणियां:

Painting: JOSEPH SEVERN / Source: Internet

 

देखते रहो

सारे रंगों को

इन तस्वीरों मे सिर्फ तुम्हे ही रंग दिखते हैं

कितना भी पुराना हो जाये

ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों का ये एल्बम

तुम्हारे बालों का रंग सफ़ेद नहीं होने देगा

 

सब के लिये कमीज़ का रंग सफ़ेद होगा

तुम्हे वो आसमानी ही दिखेगी

तुम्हारी पहली कमाई की है , है ना ?

तुम्हे इन स्वेत श्याम तस्वीरों मे दिखेगा

वो सिन्दूर जिसे डालते समय तुम्हारा चेहरा भी लाल हो गया था

 

तुम तो बात भी कर लेते हो इनसे...

बेजान दूसरों के लिये ही हैं

तुम तो सुन लेते हो

हर बार

उस पेज मे दबी से आवाज़

“आप सिर्फ फोटो ही खींचते रहेंगे ?”

और फिर

“मेरी फोटो अच्छी नहीं आती, रुकिए मैं बाल तो सही कर लूँ “

तुम महसूस भी कर लेते हो

आज भी तुमने उन बालों पर हाथ फेरा

वैसे ही जैसे तब नैनीताल मे फेरा था

“लाओ मै ठीक कर देता हूँ”

और आज भी रुक गये

“रुकिये ! क्या करते हैं आप, सब देख रहे हैं”

 

वो यादें कभी रंग नहीं बदलती

जो ब्लैक एंड व्हाइट मे सम्हाली हैं

उनका रंग बदलेगा, तब

जिस क्षण तुम सफ़ेद हो जाओगे...

 

भरत तिवारी,

नई दिल्ली,

१७/०६/२०११

०४:१५

13-6-11

कॉलबेल और नेमप्लेट / Call bell aur name-plate

1 टिप्पणी:

calbell aur nameplate

 

Dhool baithi hai

Aa kar us kone me

Kabhi

Jahan tumhari mahak hoti thi

...

Doston ko dekh kar

Sofa khush nahin hota

Baahar baithak men use tumhari aadat hai

...

Phooldaan men ab

Phoolon ki jagah plastick ne le li hai

Aur fir bhi pani saaf nahin lagta

...

Ashtray ki rakh

Haf’ton purani hoti hai

Kabhi jab dhoondh ke nikalni pade

Kuch purane dost

Unke aane par

... Kafi arsa hua mujhe chhode

...

Painting

Main khud hi sidhi kar deta hoon

...

Chabhi vali ghadi

Bahut din hue dikhi nahin

...

Haan baahar nameplate

Vaisi ki vaisi hi hai

Meri tarah

Call bell ko dabaati

Har ungli ko dekhati hai

Kab milega

Tumhari por ka sparsh

Usse

Aur mujhe...

...

...

Bharat Tiwari

13-06-2010 , New Delhi

© Bharat Tiwari (All rights reserved)

12-6-11

Faces:: Srinagar

कोई टिप्पणी नहीं:

जब हवा मे था कैमरा तब ही बाहर आने को कहने लगा ; शायद आँखों की भाषा समझता होगा ; सात रातें कश्मीर की सात रंग और सात जन्म सी…. कुछ तस्वीरें वहाँ के बोलते चेहरों की आप के लिए …

सादर भरत

Was in the air only when my Canon D1000 with 55-250 lens started asking to come out; probably understands the language of the eyes; the seven nights of Kashmir were like seven lives and seven colors  .... Some photographs of the Speaking faces for you ...
Regards Bharat

9-6-11

समुंद्र मंथन … नरेन्द्र व्यास

15 टिप्‍पणियां:

narendra vyas - kabhi kabhi sonchta hoon

छाया चित्र : इंटरनेट से

Dinesh Choubey 

नरेंद्र भाई... बिना सांस लिए पूरी कविता पढ़ गया..इतनी गति है इसमे...
कितने गहरे शब्द इस्तेमाल किए हैं जैसे बलुआ देह...

8-6-11

सुने ज़रा ८/६/२०११ sune zara 8/6/2011

कोई टिप्पणी नहीं:
हमने उन लम्हों को दिल मे संजो रखा है
जिन यादों ने पलकों को भिंगो रखा है...


Humne un lamhoN ko dil me sanjo rakha hai
jin yaadoN ne palkoN ko bhingo rakha hai... 

7-6-11

Parinda-e-man tu udd ke aaj ibda* ban jaParinda-e-man tu udd ke aaj ibda* ban ja / परिंदा-ए-मन तू उड़ के आज इब्दा बन जा

5 टिप्‍पणियां:
परिंदा-ए-मन तू उड़ के आज इब्दा बन जा
उस के दिल मे उतर उसका पसंदीदा बन जा …
Parinda-e-man tu udd ke aaj ibda* ban ja  
Us’ke dil me utar uska pasan’dida ban ja …  

4-6-11

13 टिप्‍पणियां:

कृत्या में सात


imageimage





image


एक...
इस शब्द में ही गडबड़ी है
ना जाने किसने सृजन किया
शब्दों की जन्म कुण्डली तो अब बनायीं जाती है
फलां शब्द किसने कब और क्यों कहाँ
और बाकी के ना जाने क्या क्या ब्योरे
‘इन्तेजार’ शब्द की बात कर रहा हूँ
जब से पैदा हुआ होगा
किसी को नहीं बक्शा
सृष्टि के बाद भी ये नहीं जायेगा...

दो...
तुम और मैं
साथ हुआ करते थे
दिन के हर पहर में खुश
तब हमेशा के किये जन्मों का साथ था
याद है पीर बाबा की मज़ार से वापसी
तुमने या फिर शायद मैंने कहा था
सात जन्मो का साथ माँग लिया है !
वो धागा अब भी “इन्तेज़ार” करता होगा
उसका भी और तुम्हारा मेरा भी रंग लाल था
रिश्ते खून के रंग से नहीं बनते, उसे क्या मालूम
“इन्तेज़ार” तो हम भी करते ही रहेंगे
उन दिनों का जो अब नहीं आयेगें
“इन्तेज़ार” साहेब आप भी कमाल के हैं उम्मीद की डोर को टूटने नहीं देते आप


नेटवर्क ब्लॉग मित्र