29-10-11

Subah mē abhī vaqt hai . सुबह मे अभी वक्त है.

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तनी खूबियाँ देकर


तुम्हे धरा दी गयी
...
अनगिनत विचार
जिन्हें पाल-पोस कर ज़िंदा करने का दायित्व
"सिर्फ" तुम्हारे पास था
...
अच्छी शुरूआत हमेशा अच्छी नहीं होती ,
ये तुमने "क्यों" कर गलत सिद्ध किया
...
पराजित हुए
मदमस्त हो
मरीचिका मे रह कर
विजय का जश्न
"कैसे" मना सकते हो
तुम !
...
अब भी टटोलोगे
तो बहुत सारी
"ब्रेन शेलस्"
साँस लेती मिल जायेंगी
फिर रात के भूले हो
और....
सुबह मे अभी वक्त है
...
सिद्ध कर दो
अच्छी शुरूआत हमेशा अच्छी होती है !!!
एक विराम आया
तो "क्या" .......... !
                                    नई दिल्ली , १७३१ , २९.१०.२०११

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Itnī khūbiyāN dēkar

Tumhē dharā dī gayī
...
Anginat vichār
JinhēN pāl-pōs kar zindā karnē kā dāyitva
"Sirf" tumhārē pās thā
...
Acchī śhurū'āt hamēśhā acchī nahīN hōtī,
Yē tumnē "kyōN" kar galat sid'dh kiyā
...
Parājit hu'ē
Mad'mast hō
Marīchikā mē rah kar
Vijay kā jaśhn
"Kaisē" manā saktē hō
Tum!
...
Ab bhī ṭaṭōlōgē
Tō bahut sārī
"Brain Cells"
SāNs lētī mil jāyēṅgī
Phir rāt kē bhūlē hō
Aur....
Subah mē abhī vaqt hai
...
Sid'dh kar dō
Acchī śhurū'āta hamēśhā acchī hōtī hai !!!
Ēk virām āyā
Tō "kyā" .......... !
                       New Delhi 1736, 29.10.2011

22-10-11

हाफ़ लाइफ Half Life

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19-10-11

कैसे करता है इश्क की बातें

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कैसे करता है इश्क की बातें 
बिछा कर हर तरफ ज़िंदा लाशें 
ले कर किसी ऊपर वाले का नाम
मार देता है ज़िंदा इंसान 
हाथ पर हाथ रख बुत ना रहो
शमशीर उठाओ और शमशीर बनो 
दूर से देखोगे तमाशा कब तक
घर पहुँच जायेगी आग ये तब तक
मुंडेर हैं जुड़ी पड़ोस के घर से
सो रहा है तू और वो हैं रोते
अभी दस्तक तेरे किवाड़ पर भी आयेगी
तब जब उनकी चिता जल जायेगी
तेरी मिट्टी भी वहीँ होगी गरम
जिस जगह उसने थोड़ा होगा दम
अब कोई वक्त नहीं आयेगा
जो ना जागा तो तू सो जायेगा
और सो जायेंगे तेरे सारे ख्वाब
बस नज़र आयेगा "वो" दोस्त तेरा
जो खा रहा है गोस्त तेरा ...

अब कोई वक्त नहीं आयेगा
जो ना जागा तो तू सो जायेगा..
अब कोई वक्त नहीं आयेगा
जो ना जागा तो तू सो जायेगा...


Kaisē kartā hai iśhq kī bātēN
Bichā kar har taraf zindā lāśhēN
Lē kar kisī ūpar wālē kā nām
Mār dētā hai zindā insān
Hāth par hāth rakh but nā rahō
Śhamśhīr uṭhā'ō aur śhamśhīr banō
Dūr sē dēkhōgē tamāśhā kab tak
Ghar pahuNcha jāyēgī  āg yē tab tak
Muṇḍēr haiN juṛī padōs kē ghar sē
Sō rahā hai tū aur vō haiN rōtē
Abhī dastak tērē kivād par bhī āyēgī
Tab jab unkī chitā jal jāyēgī
Tērī miṭṭī bhī vahīN hōgī garam
Jis jagah usnē thōdā hōgā dam
Ab kō'ī vaqt nahīN āyēgā
Jō nā jāgā tō tū sō jāyēgā
Aur sō jāyēNgē tērē sārē khwāb
Bas nazar āyēgā" wō" dōst tērā
Jō khā rahā hai gōst tērā...
Ab kō'ī vaqt nahīN āyēgā
Jō nā jāgā tō tū sō jāyēgā...
Ab kō'ī vaqt nahīN āyēgā
Jō nā jāgā tō tū sō jāyēgā...

10-10-11

Kaash Afvaah Hoti काश अफ़वाह होती

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jagjit-kisi-gaflat-men

कुनै भूलमा पनि बाँच्छु केही दिन

तिम्रो गितमा मिली दिन्छु केही दिन

भर्खरै खबर आयोएकदमै ताजा छ

अब गलत सम्झन्छु केही दिन…

कुनै भूलमा पनि बाँच्छु केही दिन

तिम्रो गितमा मिली दिन्छु केही दिन …

Translated to Nepali by Smriti Dhungana स्मृति ढुंगाना

8-10-11

चीख़ / Cheekh

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cheekh



























सादर भरत तिवारी



1-10-11

कृत्या अक्टूबर २०११ | Kritya October 2011

2 टिप्‍पणियां:
सादर समर्पित सब दोस्तों को !!!! हमेशा आपका भरत 

kritya-2011-10-october

1. अग्फा और कैनन और मैं

तस्वीर उतारता रहा
अपने कैमरे को मैंने अपना बचपन पहना दिया
और बोला कि
तुम ! जो बड़ी बड़ी तस्वीरें खींचते हो
आज वो खींचो
जो मैंने
'अग्फा' से उतारी थी//
वो अपनी आँखों को मेरी आँखों का सहारा ले
कोशिश करता रहा
थक गया //
मैंने मजाक किया उससे
"भाई तुम तो बड़े टाइप के हो, मेरा 'अग्फा' वो नहीं थकता था छोटा था फिर भी ....
... तुम्हे तो रीलें भी पैदाइशी मिली है
जैसे चांदी का चम्मच ले पैदा हुए हो "
उसकी थकान बस एक बैट्री भर से मिट गयी
और बिना कुछ जवाब दिये
वापस शुरू हो गया वो , क्लीक क्लीक ! //
रात को मैंने दुबारा जब कहा "तुमसे नही होगा !"
वापस बिफर उठा मुझ पर ही
"गया वक्त वापस नहीं आता
गए वक्त की तस्वीरें नही उतरती "
बोला !
"तुम खुश किस्मत हो
तुम्हारे ज़हन में तो है
उसको ही सम्हाल लो
अब वो तस्वीरें ज़हन से बाहर 'कभी' नही आएँगी
'अग्फा' हो या 'कैनन'
तुम्हारे साथ वो भी बड़े हो गए हैं"///
मैं चुपचाप बच्चों की तस्वीरें उतारने लगा
उसने बचपन का जामा उतार के
गेस की जींस वापस पहन ली थी

2.
वक्त के उस 'एक' सिरे की तलाश है /
जिसके अँधेरे की रोशनी से मेरे चिराग अब भी रौशन हैं //
जो धडकनों को काबलियत दे रहा है /
सालार बन के लगाम थाम //
डोर थामी है गुड्डे की /
फूँक रहा है जज़्बा-ए रवां, जाविदाँ/
तमाम पीरों की दुआ /
दुआ का असर/
असर के असर से दौड़ती सारी उम्मीदें /
उम्मीदों का खैरख्वाह /
सब 'उसी' सिरे के जानिब हैं//
सफ़र था लंबा/
अब कट गया/
अब आने को है 'वो' हाथ मेरे//

*सालार leader
*जाविदाँ everlasting

3.
एक मीठी मुस्कान ले आना 
जब आना तुम......
जीने के अरमान ले आना
जब आना तुम......
धूल सनी डायरी तुम्हे ही सोंचती होगी
कुछ गीत ग़ज़ल कुछ शेर नज़्म ले आना
जब आना तुम......
करके बसेरा है पसरा गहरा ठंडा सन्नाटा
बेपरवाह हँसी, लबों की गर्माहट ले आना
जब आना तुम......
मंदिर मस्जिद गिरजों मे तो मिले नहीं
ढूँढ के जो मिल जायें भगवान ले आना
जब आना तुम......
साथ नहीं है देता वक्त और वक्त के लोग
बढ़ती सी इस उम्र का चैन आराम ले आना
जब आना तुम......

है हमसे मजबूत हमारे रिश्ते की बुनियाद
इस दुनिया की खातिर कोई नाम ले आना
जब आना तुम......
समय रुका है जहाँ छोड़ के गये थे तुम
गये वक्त मे देना था जो प्यार ले आना
जब आना तुम......
साँसें घुटती हैं अब ईंट की छत के नीचे
छोटा सा आँगन और पेड़ की छाँव ले आना
जब आना तुम......
एक ज़माना गुज़रा सुने हुए दिल को
'भरत' की गुम धड़कन को भी ले आना
जब आना तुम......

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