24/2/12

सात क्षणिकाएँ




❖❖एक………………………..……….

कोई शब्दों का जाल नहीं है
तुम्हारे लिए तो बुन भी नहीं सकता
तुम ने वो ब्रेल सीखी है
जो मेरे मन को पढ़ ले




❖❖दो………………………….……….

मैं तुमसे झूठ नहीं बोल सका
सच कह नहीं पाया
तुम फिर भी सब पढ़ सकी
समझ भी मुझे
सिर्फ तुम ही पायी





❖❖तीन……………………….……….

आखिर तुम्हारे बालों में है क्या
क्यों बंधा नहीं देख पाता
अलग हूँ शायद इसलिए
उन्हें खुला देख
अपने को पा लेता हूँ
मत बाँधा करो मुझे





❖❖चार…………………………..…….

कुछ नोस्टाल्जिया शायद डेजा वू होते हैं
तुम्हारी याद
तुम
उन पेड़ों के साये
महक तुम्हारी , वो भी
लिस्ट काफी लंबी है





❖❖पांच………………….…………….

अब कैसे कहूँ
हिचकी आती है तो पानी नहीं पीता
तुम्हे याद करने का बहाना है
जब आखरी आएगी
तब गंगाजल पिला देना





❖❖छः……………………..………….

शहर शायद वैसा ही है
जाओ तो नए चेहरे हैं
ऐसा नहीं है ,पुराने भी हैं
हाँ
तुम और मैं
दोनों नहीं है
या एक साथ नहीं होते
मर गया वो शहर
जहाँ हम साथ थे




❖❖सात………………………….

बारिश से लगाव
नहीं गया
जायेगा भी नहीं
तुम होते हो ना उसकी हर बूँद में
मैं अपनी अंजुली में भर लेता हूँ
तुमको
हर बारिश में
भीगा देता हूँ अपनी शर्ट को तुमसे
बादलों ! तुम्हारा शुक्रिया

 

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