19/3/12

Thakte nahin gham roz chale aate hain / थकते नहीं ग़म रोज़ चले आते हैं

Thakte nahin gham roz chale aate hain / थकते नहीं ग़म रोज़ चले आते हैं

7 टिप्‍पणियां:

  1. thakte nahi gum roz chale aate hain....wha! kya baat hai !

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  2. बहुत सुंदर...रचना के भाव अपने से लगते हैं..बहुत सटीक प्रस्तुति...

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  3. बस कुचलते हो रास्ते पैरों तले
    भूल ये की मजिल
    वो ही ले जातें हैं ....

    सबसे अलग ... सबसे जुदा ...आपका अंदाज़ ...!!
    हमेशा की तरह बहुत ही सुन्दर !!!!

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  4. edhar kamal ka nikhar hai kalam men ...
    khub likhiye... hindi men ek shayar paida ho raha hai.

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  5. बहुत खूब तिवाडी साहिब सचमुच गम कभी नहीं थकते ..मगर नूर साहिब ने कहा है..गम मेरे साथ बहुत दूर तक गए /मुझ में थकन न पायी तो बेचारे थक गए

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  6. हम भी कहाँ थकते हैं
    ना ना कर के भी
    रोज़ इन्हें सह जाते हैं
    थकते नहीं गम रोज़ चले आते हैं....
    बहुत खूब लिखा है आपने....बधाई स्वीकार करें

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