27/7/12

बक्स-ए-अहमक़ / Baks -e- ahmaq


बक्स-ए-अहमक़ * तू ये झूठ दिखाता रह और
तू  भी  राजा का  है शागिर्द  छुपाता  रह और

तूने  ही खाब की  झलक कल दिखाई थी हमें
अब  हुआ रू ब रू तो ख्वाब  बताता  रह और

चोर  हाकिम  हो  तो  दरबार  ही  अड्डा होगा
इल्म  ये  सबको  है  तू  राज़ छुपाता रह और

सब  समझ  कर  भी  तब  नादान बने बैठे थे
अब उसने घाव दिया है  तो दिखाता  रह और 

जिस  नासूर से तेरा  सारा जिस्म  राख  हुआ
तू  उसकी आग को बुझने  से बचाता रह और
* बुद्धू बक्सा / टी.वी.
                           -------

Baks -e- ahmaq*  tu  ye  jhooth  dikhata  rah aur
Tu  bhi  raja  ka  hai  shagird chhupata rah aur

Tune  hi  khaab  ki  jhalak kal dikhai thi hameN
Ab  hua  ru- b -ru  to  khwaab  batata   rah aur

Chor   haqim   ho   to   darbaar  hi  adda  hoga
Ilm  ye  sabko  hai  tu  raaz  chhupata  rah aur

Sab  samajh  kar  bhi  tab nadan bane baithe the
Ab  ussne  ghav  diya  hai  to  dikhata  rah aur

Jis   naasoor  se  tera  saara  jism  raakh  hua
Tu  uss'ki  aag  ko  bujhne  se  bachta  rah aur
Television 


. . . shajar 27.07.2012, new delhi

4 टिप्‍पणियां:

  1. Halaat ka gubaar akshar odhkar rone laga,
    Ummid ka daaman bhi chhodkar jane laga.

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  2. घुमते घूमते यहाँ आ पहुंची...!
    तो लगा कि कभी कभी भटकना भी सार्थक होता है...!!

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    1. बहुत आभार आपका पूनम जी
      ... भरत

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