1/8/12

लड़ाई / ladai


Roushni ki lau
Andhere ko hata to deti hai
Lekin
Haar jaati hai thak kar
Aur kho jaati hai
Ussi andhere me
Naa jaane kahan gum ho jaati hai
… andhera bahut kaala bahut gahra aur bahut bada hota hai
shajar


8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब। पसंद आई। क्या भारत तिवारी और शजर एक ही शख़्सियत के दो नाम हैं?

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    1. शम्स भाई शुक्रिया
      सादर
      भरत तिवारी 'शजर'

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  2. शम्स भाई शुक्रिया
    ... भरत तिवारी "शजर"

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  3. बहुत खूब भाई!

    अँधेरे का वजूद रौशनी से है
    जैसे प्यास का वजूद तश्नगी से

    लेकिन फिर भी सिमट जाती हैं
    हजारों रौशनियाँ इस अँधेरे में
    गुमनाम सी, मर जाती हैं

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  4. रौशनी की लौ

    डूबती है

    गहरे में

    तुम्हारे लिए ही

    लाना है

    उसको कुछ

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  5. घर तो

    होता है

    हमारा

    नहीं होता

    कोरा

    मेरा

    ठोकर

    सिखाएगी

    दम है

    कितना

    हमारे में.

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  6. भरत भाई दिये की लौ और हमारा घर .....

    पंक्तियाँ सुंदर बनी हैं........पंक्तियों को पंख लगाओ

    इनको उड़ने दो..........पूरा आसमान....है किसलिए

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