1/10/12

Kis ko nazar kaeN, apni nazar yahaN @BharatTiwari #Shajar

The Starry Night - Vincent van Gogh.

किस को नज्र करें अपनी नज़र यहाँ
इक ख्वाब जो सजाया बरपा कहर यहाँ
کس کو نظر کریں اپنی نظر یہاں
اک خواب جو سجایا، برپا قہر یہاں
Kis ko nazar kaeN, apni nazar yahaN
ik khaab jo sajaya, barpa qahar yahaN

कुछ तो सवाब के, तू भी काम कर यहाँ
खुशबू मिरी तु बन जा, कर ले बसर यहाँ
کچھ تو ثواب کے تو ,بھی کام کر یہاں
خوشبو میری تو بن جا ,کر کے بسر یہاں
kuch to sawab ke, tu bhi kaam kar yahaN
khushbu meri tu ban ja, kar le basar yahaN

हमने मकान की इक ईंट थी रखी 
बदला तिरा इरादा, छूटा शहर यहाँ 
ہم نے مکان کی اک اینٹ تھی رکھی
بدلہ تیرا ارادہ، چھوٹا شہر یہاں
hamne makaan kii ik iNt thi rakhi
badla tira iraada, chhoota shahar yahaN

मजबूत है अकीदा, रब इश्क में मिला 

मजबूरी-ओ चलाकी है बे-असर यहाँ 
مضبوط ہے عقیدہ، رب عشق میں ملا
مجبوری و چالاکی ہے بے اثر یہاں
majboot hai aqida, rab ishq meN mila
majburi-o-ch’laaki hai be-asar yahaN
Gogh, Vincent van: Fields and Cypresses

हर शय चला रहा जो आता नहीं नज़र 
किसको दिखा रहा तू अपना हुनर यहाँ
ہر شے چلا رہا جو آتا نہیں نظر
کس کو دکھا رہا تو اپنا ہنر یہاں
har shay chala raha jo aata nahi nazar
kisko dikha raha tu apna hunar yahaN

वो दोस्ती न करना, जो निभाह ना सको

आसां नहीं परखना सबका जिगर यहाँ 
وہ  دوستی نہ کرنا ,جو نباہ نہ سکو
آسان نہیں پرکھنا سب کا جگر یہاں
vo dosti na karna, jo nibah na sako
aasaN nahi parakhna sabka jigar yahaN

तुम खेल खूब खेलो, वाकिफ़ रहो मगर 
आशिक नहीं रहा अब तेरा ‘शजर’ यहाँ
تم کھیل خوب کھیلو ,واقف رہو مگر
عاشق نہیں رہا اب تیرا "شجر" یہاں
tum khel khoob khelo, waqif raho magar
aashiq nahi raha ab tera ‘shajar’ yahaN


.... भरत तिवारी / Bharat Tiwari
Urdu translation by dear friend Samina Mir 

18 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !! आला दर्जे की ग़ज़ल भरत जी ..........इसके लिये भी आप मुबारकबाद के मुस्तहक़ हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. खूबसूरत गज़ल है.ये शेर खासतौर पे पसंद आया

    वो दोस्ती न करना, जो निभाह न सको.
    आसां नहीं परखना सबका जिगर यहाँ.

    उत्तर देंहटाएं
  3. kya likha hai janaab! behtareen ghazal.. likhte rahiye aur hamein sikhaate rahiye :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. धन समर्पित मन समर्पित तन समर्पित
    देश की माटी तूझे और क्या नजर करुँ

    उत्तर देंहटाएं
  5. हमने माकन की इक ईंट थी रखी,
    बदला तिरा इरादा , छुटा शहर यहाँ !...क्या बात है भरत भाई ! जियो ! बहुत मस्त ग़ज़ल है !

    उत्तर देंहटाएं
  6. अच्छा लगा..
    नाम याद नहीं आ रहा। एक शायर ने कहा है-
    शेर अच्छा या बुरा नहीं होता।
    या तो होता है या नहीं होता।

    ग़ज़ल हो गई तो शेर है... और शेर है तो है... मज़ा आया पढ़ के...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. पंकज भाई ... बड़ी बात कही आपने
      आभार

      हटाएं
  7. achhi gazal............hamane makan ki ik iint rakhi thi.....kya bat hai .......

    उत्तर देंहटाएं

स्वागत है

नेटवर्क ब्लॉग मित्र