5/11/12

दिये जो दर्द तुमने हैं diye jo dard tumne haiN



दिये जो दर्द तुमने  हैं, हसीं  हमदम बला के हैं  
उसूलन   मर गये होते, मगर मरहम बला के हैं

भी जागे नहीं हैं  हम, अभी कुछ ख्वाब बाक़ी हैं
मिरी नींदें  मुझे दे  दो, जिगर  में  गम बला के हैं

मारे  दिन  बदलने थे,  मुहब्बत  हो  गई  तुमसे
बनी जन्नत मिरी दुनिया, हुए मौसम बला के हैं 

diye jo dard tumne haiN, hasiN hamdam bala  ke haiN
Usoolan  mar  gaye  hote,  magar marham bala ke haiN

abhi jaage nahiN haiN hum, abhi kuch khwaab baqi haiN  
miri  niNdeN  mujhe  de do, jigar meN gam bala ke haiN

hamare  din  badalne the, muhabbat ho gayi tumse
Bani jannat miri duniya, huye mousam bala ke haiN


2 टिप्‍पणियां:

  1. हमारे दिन बदलने थे, मुहब्बत हो गई तुमसे
    बनी जन्नत मिरी दुनिया, हुए मौसम बला के हैं

    बहुत खूब भाई !

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  2. वाह....
    खूबसूरत गज़ल...
    काश के १-२ शेर और कहे होते.....
    बहुत खूब!!

    अनु

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