25/2/12

Saath chhoti kavitayen

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❖❖One……………………………………………

Koi shabdon ka jaal nahin hai
Tumhare liye to bun bhi nahin sakta
Tumne to ‘Braille’ seekhi hai
Jo mere man ko padh le


❖❖Two……………………………………………

Main tumse jhooth nahin bol saka
Sach kah nahin paya
tum fir bhi sab padh saki
Samajh bhi mujhe
Sirf tum hi paayi

❖❖Three…………………………………………
Aakhir tumhare baalon me hai kya
kyon bandha nahin dekh paata
Alag hoon shayad iss’liye
Unhe khula dekh
Apne ko pa leta hoon
Mat bandha karo mujhe

❖❖Four……………………………………………

Kuch ‘nostalgia’ shayad ‘déjà vu’ hote hain
Tumhari yaad
tum
Unn pedon ke saaye
Mahak tumhari, wo bhi
List kaafi lambi hai

❖❖Five……………………………………………

Ab kaise kahoon
Hich’ki aati hai to paani nahin peeta
tumhe yaad karne ka bahana hai
jab aakhri aayegi
tab ganga-jal pila dena

❖❖Six………………………………………………

Shahar shayad waisa hi hai
Jao to naye chehre hain
aisa nahi hai, purane bhi hain
haan
Tum aur main
Dono nahin hain
Yaa ek saath nahi hote
Mar gaya wo shahar
Jahan ham saath the

❖❖Seven……………………………………………

Bearish se lagav
Nahin gaya
Jaayega bhi nahin
Tum hote ho na usski har boond me
Main apni anjuli me bhar leta hoon
Tumko
Har barish me
Bhiga deta hoon apni ‘shirt’ ko tumse
Baadlon ! tumhara shukriya


❖❖Bharat………………………….……………………….
Reposted : These were earlier posted in “Aakhar Kalash”, posting again here (since i love them)

24/2/12

सात क्षणिकाएँ

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❖❖एक………………………..……….

कोई शब्दों का जाल नहीं है
तुम्हारे लिए तो बुन भी नहीं सकता
तुम ने वो ब्रेल सीखी है
जो मेरे मन को पढ़ ले




❖❖दो………………………….……….

मैं तुमसे झूठ नहीं बोल सका
सच कह नहीं पाया
तुम फिर भी सब पढ़ सकी
समझ भी मुझे
सिर्फ तुम ही पायी





❖❖तीन……………………….……….

आखिर तुम्हारे बालों में है क्या
क्यों बंधा नहीं देख पाता
अलग हूँ शायद इसलिए
उन्हें खुला देख
अपने को पा लेता हूँ
मत बाँधा करो मुझे





❖❖चार…………………………..…….

कुछ नोस्टाल्जिया शायद डेजा वू होते हैं
तुम्हारी याद
तुम
उन पेड़ों के साये
महक तुम्हारी , वो भी
लिस्ट काफी लंबी है





❖❖पांच………………….…………….

अब कैसे कहूँ
हिचकी आती है तो पानी नहीं पीता
तुम्हे याद करने का बहाना है
जब आखरी आएगी
तब गंगाजल पिला देना





❖❖छः……………………..………….

शहर शायद वैसा ही है
जाओ तो नए चेहरे हैं
ऐसा नहीं है ,पुराने भी हैं
हाँ
तुम और मैं
दोनों नहीं है
या एक साथ नहीं होते
मर गया वो शहर
जहाँ हम साथ थे




❖❖सात………………………….

बारिश से लगाव
नहीं गया
जायेगा भी नहीं
तुम होते हो ना उसकी हर बूँद में
मैं अपनी अंजुली में भर लेता हूँ
तुमको
हर बारिश में
भीगा देता हूँ अपनी शर्ट को तुमसे
बादलों ! तुम्हारा शुक्रिया

 

15/2/12

Ek baat aur एक बात और One more thing আরও একটি জিনিস ایک بات اور

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सपने नहीं आते.


याद बदस्तूर आये जा रही है. काम का बोझ ना तो बढ़ा है और ना ही घटा.


विस्मय इस बात का है कि “तब” जब तुम्हारे आने का इन्तज़ार था और “अब” जब की तुम आ गये हो.


इस तब और अब में ...


फर्क सिर्फ इतना ही है कि अब सपने नहीं आते - तुम्हारे .


एक बात और


“वो” इन्तज़ार किसका था और ...


“ये” याद आखिर किसकी है ?






سپنے نہیں آتے

یاد بدستور اے جا رہی ہے .. کام کا بوجھ نہ تو بڑھا ہے اور نہ ہی گھٹا

وسمے اس بات کا ہے کہ" تب "جب تمھارے آنے کا انتظار تھا اور "اب" جب کہ تم آ گئے ہو

... اس تب اور اب میں

فرق صرف اتنا ہی ہے کہ اب سپنے نہیں آتے .. تمہارے

ایک بات اور

"وہ" کس کا انتظار تھا

... اور

یہ" یاد" آخر کس کی ہے


Thanks for the great help !Urdu translation courtesy SM... DHs always




Sapnē nahī aatē.


Yaad ba’dastūr aayē jā rahī hai. Kaam kā bōjh nā tō badhā hai aur nā hī ghaṭā.


Vismay iss baat kā hai ki “tab” jab tumhārē aanē kā intizaar thā aur “ab” jab kī tum aa gayē hō.


Is tab aur ab mē …


Farq sirf itnā hī hai ki ab sapnē nahī aatē - tumhārē.


Ek baat aur ,


“Wō” kiskā intizaar thā


aur...


“Yē” yaad "aakhir kiskī hai ?


Not dreaming anymore.


Lack fullness is intact. Workload - neither increased nor decreased.


Wonderment is the fact that "then" when there was a waiting and “now” since you are here


Then and now...


The only difference is that am not dreaming of- you.


One more thing


Whose wait was “that”


And…


Who is being missed “now”?


না স্বপ্ন না.


ঝুলান এখানে অনুপস্থিত. আপনাদের কারোরই না বৃদ্ধি কাজের চাপ হ্রাস.


বস্তুত সম্ভ্রম যে "" যখন আপনি "এখন" জন্য অপেক্ষা করুন যখন আপনি এসেছেন.


তারপর এবং বর্তমানে ...


শুধু পার্থক্য হল যে স্বপ্ন না আসা না - আপনি.


আরও একটি জিনিস


"সে" কে জন্য অপেক্ষা ছিল ...


"এই" মনে কি নরকে তাই না?

13/2/12

Tanha’ii ko door bhagaana ab itna aasaan nahin hai / तन्हाई को दूर भगाना अब इतना आसान नहीं है

5 टिप्‍पणियां:
Tanha’ii ko door bhagaana ab itna aasaan nahin hai - Bharat Tiwari
तन्हाई को दूर भगाना अब इतना आसान नहीं है - भरत तिवारी 

8/2/12

धुन बुन डालो नई

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सुबह करे तारों की बातें

शाम जगा कर रात ये लोग

जाने किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

खुद को छुपा नक़ाब में

करें खुब बड़ी बात ये लोग...

जाने किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

एक को इक और दो को दूजा

तीन को पांच बनाते लोग...

जाने किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

अपनी छोटी सी बुद्धि को

बना टांग अटकाते लोग...

जाने किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

चश्मे के भीतर से देखें

दिन मे रात के तारे लोग...

जाने किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

भेड़ीयाधसान में ना जाना

हैं रंगासियार ये लोग...

जाने किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

भरत रहो तुम अपनी धुन में

धुन  बुन डालो नई नई

कहाँ हो सुनते उनकी बातें

जो ना जाने दिल की बातें

और ना जाने

किस की खातिर

कवितायेँ हैं लिखते लोग...

7/2/12

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