12/2/13

बड़े दिन पर खिला है गुल | bade din par khila hai gul

बड़े दिन पर खिला है गुल,  लगाना मत नज़र अब तुम
अभी तितली को आना है , उठाना मत नज़र अब तुम
फलक के पार तक उड़ना अगर हो बाज़ सा बन कर
हवा को देखना हरदम हटाना मत नज़र अब तुम 
अभी तो बस ज़रा सा ही तुम्हे उसने बनाया है 
खुदी को भूल ना जाना, फिराना मत नज़र अब तुम
बुलंदी कामयाबी की बना देती है दीवाना 
बुजुर्गों की सुना करना उठाना मत नज़र अब तुम
तुझे पैदा किया जिसने , रगों में खून दौड़ाया
उसे कैसे भुला डाला, मिलाना मत नज़र अब तुम 
‘शजर’ डरता नहीं है वो खरा औ साफ़ दिल हो जो 
उसे ना छेड़ना बिलकुल दिखाना मत नज़र अब तुम
bade din par khila hai gul 
lagana mat nazar ab tum
abhi titli ko aana hai 
uthana mat nazar ab tum
falak ke paar tak uddna 
agar ho baaz saa ban kar
hava ko dekhna hardam 
hatana mat nazar ab tum
abhi to bas zara sa hi 
tumhe usne banaya hai
khudi ko bhool naa jana 
firana mat nazar ab tum
bulandi kamyabi ki 
bana deti hai dewana
buzurgon ki suna karna 
utthana mat nazar ab tum
tujhe paida kiya jisne 
ragoN me khoon doudaya
use kaise bhula dala 
milana mat nazar ab tum
‘shajar’ darta nahi hai vo 
khara au saaf dil ho jo 
usse na cheddna bilkul 
dikhana mat nazar ab tum

5 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा गजल है.....खासकर आखिर का शेर तो कमाल है.....

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. जानदार प्रस्तुति .........मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत रहेगा ...

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    1. शुक्रिया श्रीराम जी, जरुर देखूंगा

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