27/2/13

आठवां




परिंदा बन रहा हूँ
परों पर कोपलें
उग रही हैं

सुना है
तुमने
सात आकाश बनाये हैं
मुझे आठवां देखना है

और तुम जिस आकाश से देखते हो
उसमें तुम्हे
देख लेता हूँ
खिड़की का पर्दा हटा कर

4 टिप्‍पणियां:

  1. उन्मुक्ति की कामना की सुंदर कविता

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  2. सुना है
    तुमने
    सात आकाश बनाये हैं
    मुझे आठवां देखना है...lajawab

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